डिंडौरी। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेशभर में चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” को लेकर अब ग्रामीण क्षेत्रों में सवाल उठने लगे हैं। एक ओर प्रशासनिक अमला जल संरक्षण कार्यों की तस्वीरें और वीडियो जारी कर अभियान की सफलता के दावे करता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर डिंडौरी जिले के कई गांव भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई स्थानों पर हैंडपंप बंद पड़े हैं, कुओं का जलस्तर नीचे जा चुका है और ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

ताजा मामला रविवार का है, जब डिंडौरी-अमरकंटक नेशनल हाईवे स्थित सागर टोला चौराहे पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से गांव में पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन शिकायतों और मांगों के बावजूद प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही दिए जाते रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। जगह-जगह गड्ढे खोदकर, निरीक्षण कर और फोटो सेशन आयोजित कर अभियान को सफल बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर जल संकट दूर करने के लिए कोई ठोस और स्थायी प्रयास नजर नहीं आ रहे। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रभावी कार्य किए गए होते तो आज गांवों में पीने के पानी के लिए संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं होती।

भीषण गर्मी के चलते जिले के कई जल स्रोत सूख चुके हैं। कई गांव टैंकरों के भरोसे हैं, जबकि महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के दौरे और तस्वीरों से जनता की प्यास नहीं बुझ सकती। लोगों को प्रचार नहीं, बल्कि स्थायी पेयजल व्यवस्था चाहिए।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेयजल योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। योजनाएं कागजों और रिपोर्टों तक सीमित दिखाई दे रही हैं, जबकि गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाइश दी। अधिकारियों ने जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद चक्का जाम समाप्त हुआ और यातायात बहाल हो सका। हालांकि ग्रामीणों का साफ कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि गांव में पानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण केवल अभियान चलाने से सफल नहीं होगा। इसके लिए पुराने तालाबों का गहरीकरण, वर्षा जल संग्रहण, बंद पड़े जल स्रोतों का पुनर्जीवन और दीर्घकालिक कार्ययोजना पर गंभीरता से काम करना होगा। केवल फोटो और आंकड़ों के आधार पर सफलता का दावा करने से जल संकट का समाधान संभव नहीं है।
