मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करंजिया विकासखंड के एक उत्कृष्ट विद्यालय में साइकिल वितरण कार्यक्रम के दौरान छात्रों से ही वाहन से भारी साइकिलें उतरवाने का वीडियो वायरल हो गया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गया है, बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य और बच्चों के अधिकारों को भी ठेंगा दिखाने जैसा है।
बताया गया कि बुधवार को विद्यालय परिसर में साइकिलें लेकर एक ओवरलोड वाहन पहुंचा। लेकिन इन्हें खाली कराने के लिए कोई मजदूर या कर्मचारी तैनात नहीं किया गया। उल्टा, कक्षा में अध्ययन कर रहे छात्रावास के बच्चों को बुलाकर वाहन से साइकिलें उतरवाई गईं। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छोटे-छोटे छात्र भारी साइकिलें वाहन से उतार रहे हैं और मौके पर कोई जिम्मेदार शिक्षक या अधिकारी मौजूद नहीं है।
नियमों की सरेआम अवहेलना
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि विद्यालयीन बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कार्य नहीं कराया जाएगा। इसके बावजूद छात्रों से साइकिलें उतरवाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह नैतिकता और बच्चों के अधिकारों पर भी सीधा हमला है। यह घटना यह सवाल भी खड़ा करती है कि जब कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था, तो व्यवस्थाएं पहले से क्यों नहीं की गईं?
वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया है। उनका कहना है कि स्कूल बच्चों को शिक्षा देने के लिए हैं, न कि मजदूरी कराने के लिए। एक अभिभावक ने गुस्से में कहा – “अगर बच्चों से यही सब करवाना है, तो फिर स्कूलों की क्या जरूरत? सीधे बालश्रमिक घोषित कर दीजिए।”
प्रशासन और शिक्षा विभाग चुप
मामला सामने आने के बावजूद अब तक न तो शिक्षा विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई की गई है। इससे साफ होता है कि जिम्मेदार महज़ कागज़ों पर नियम निभा रहे हैं, जमीनी स्तर पर कोई संजीदगी नहीं है।

