Without Work ID & Geo Tag : बिना वर्क आईडी, बिना जियो टैग 15वें वित्त से लाखों रु. गायब! सरपंच-सचिव ने सांठगांठ कर उड़ाए ग्राम विकास के लाखों रु…

Rathore Ramshay Mardan
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मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की ग्राम पंचायतों में विकास राशि का दुरुपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा। ताजा मामला अमरपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कमरासोढ़ा से सामने आया है, जहां 15वें वित्त आयोग की राशि का सरपंच भागवती और सचिव दीपलता यादव की मिलीभगत से खुला खेल किया गया है।

दरअसल, ग्राम पंचायत कमरासोढ़ा को वित्तीय वर्ष 2023-24 में विकास कार्यों के लिए लाखों रुपये स्वीकृत हुए थे। नियमों के मुताबिक किसी भी भुगतान से पहले वर्क आईडी बनाना, जियो टैग करना और कार्य का प्रयोजन तय करना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां न तो वर्क आईडी बनाई गई, न जियो टैग हुआ और न ही कोई प्रयोजन तय किया गया। इसके बावजूद 3232,68 लाख रुपये की निकासी कर ली गई।

नियम विरुद्ध किए गए भुगतान— 21050, 15000, 11500, 10000, 2000, 3000, 6000, 5000, 5000, 11500, 11600, 25000, 40000, 3000, 40000, 2350, 1668, 12000, 12000, 12000, 12000, 9000, 6000, 3500, 3500, 5000 सहित कई राशि बिना प्रक्रिया के खर्च कर दी गई है।

यही नहीं, सरपंच भागवती और सचिव दीपलता यादव के द्वारा 5वें वित्त में भी अनियमितताएं की गईं। अमान्य बिल, धुंधले बिल, फोटोकॉपी दुकानों से मजदूरी भुगतान जैसे कई फर्जीवाड़े सामने आए हैं। यहां तक कि अभी वित्तीय वर्ष 25 चल रहा है और पंचायत के जिम्मेदारों के द्वारा आगामी वर्ष 14/02/26 का बिल फीड कर भुगतान भी कर दिया गया। साथ ही कहीं का बिल कहीं चिपका कर मनमाने ढंग से राशि आहरण की गई है।

मुद्दा सिर्फ निकासी का नहीं है। बिना वर्क आईडी भुगतान का अर्थ है कि काम का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता। न तो जनता ऑनलाइन पोर्टल पर विवरण देख सकती है और न ही ऑडिट के समय जवाबदेही तय हो पाती है। यह पूरी व्यवस्था ग्रामीण जनता के साथ विश्वासघात है। केंद्र और राज्य सरकारें गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये भेजती हैं, लेकिन जब पैसा ही पारदर्शी तरीके से खर्च न हो तो विकास अधूरा रह जाता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहेंगे या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? यदि समय रहते इस तरह की गड़बड़ियों पर लगाम नहीं लगी तो 15वें वित्त की राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी और गांव का विकास केवल कागजों पर ही सिमटकर रह जाएगा।

इनका कहना है”

“मामले की जानकारी आपके माध्यम से मिली है। जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

— लोकेश कुमार नारनौरे, जनपद पंचायत सीईओ, अमरपुर जिला डिंडौरी।

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