मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदुमेर मोहतरा में सरपंच–सचिव द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। “जनधारा न्यूज” में प्रकाशित खबर में पंचायत की राशि को निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने और अन्य व्यय के नाम पर लाखों की हेराफेरी की बात उजागर हुई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डिंडौरी प्रभारी प्रमोद ओझा ने संबंधित अधिकारियों को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।
सीईओ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ग्राम पंचायत तेंदुमेर मोहतरा में विकास योजनाओं हेतु प्राप्त राशि का दुरुपयोग सरपंच ओंकार सिंह धुर्वे और सचिव कमल सिंह पट्टा की मिलीभगत से किया गया है। पंचायत निधि से डेढ़ लाख रुपए की राशि सीधे निजी खाते में ट्रांसफर की गई है। इसके अलावा अमान्य और धुंधले बिलों के आधार पर लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया। मजदूरी और सामग्री के नाम पर एक ही वेंडर को बार-बार बड़ी राशि दी गई, जबकि नियमों के अनुसार हर कार्य के लिए वर्क आईडी और जियो टैग अनिवार्य है, परंतु इन शर्तों का पालन नहीं किया गया।
पत्र में पंचायत समन्वय अधिकारी परसराम धुरैया और शिवचरण मरकाम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है और आदेश दिया गया है कि पंचायत द्वारा किए गए सभी भुगतानों की जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों की राशि का निजी लाभ के लिए उपयोग करना गंभीर अपराध है और यदि दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में भी पंचायतों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि तय समय पर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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