मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में इन दिनों ग्राम पंचायतों के विकास हेतु भेजी जा रही पांचवें और 15वें वित्त आयोग की राशि सरपंच-सचिव की निजी संपत्ति में बदली जा रही है। विकास योजनाओं के नाम पर जारी करोड़ों की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।जिससे ग्रामीण क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदुमेर मोहतरा का आया है जहां सरपंच—सचिव की जोड़ी के द्वारा किए गए भारी वित्तीय अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। बता दें कि सरपंच ओंकार सिंह धुर्वे और सचिव कमल सिंह पट्टा द्वारा केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त राशि का दुरुपयोग किया है।

पोर्टल में लगे के मुताबिक पंचायत में बिना जीएसटी नंबर, धुंधले व अमान्य बिलों के आधार पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया। ग्राम पंचायत विकास निधि के 15 वें वित्त की टाईट अनटाईट राशि का अन्य व्यय के नाम पर राशि वर्ष 2025- 26 में 154000, 4000, 5000,3 000, 3000, 8000, 8500, 3000, 3000, 46000, 3000, 7500, 15000, किया गया साथ ही बिना जिओ फोटो के 132000, 320000,282000 एक ही वेंडर को मजदूरी के नाम पर 49000 किया गया है। नियमों के मुताबिक किसी भी भुगतान से पहले वर्क आईडी बनाना, जियो टैग करना और कार्य का प्रयोजन तय करना अनिवार्य होता है। लेकिन न जियो टैग हुआ और न ही कोई प्रयोजन तय किया गया। टाइड और अनटाइड की राशि का मनचाहा भुगतान किया गया है। बता दें कि ये भुगतान मात्र एक दो वर्षों की है। यदि विगत 5 वर्षों के बिलों को खगला जाए तो लाखों करोड़ों का घोटाला उजागर हो सकता है।

बरहाल बता दें कि भ्रष्टाचार का मामला यहीं नहीं रुक इससे एक कदम आगे बढ़ कर सरपंच—सचिव किया गया है। पंचायत के विकास कार्यों हेतु जीपीडीपी (ग्राम पंचायत विकास योजना) के तहत अधिकृत बैंक खाते से खर्च की जानी थी। इसके विपरीत, सरपंच और सचिव ने मिलकर इस राशि को निजी खाते में ट्रांसफर कर भुगतान किया। दस्तावेजों के अनुसार, ₹8,500, ₹30,450, ₹8,500, ₹16,750, ₹50,000, ₹5,000 और ₹9,000 की राशि ऐसी ही कई बिल लगा अपने निजी खाते में स्थानांतरित की गई।
इतना ही नहीं, फोटोकॉपी जैसे सामान्य कार्यों के नाम पर भी मनमाना भुगतान हुआ, जिससे नियम निकाय व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। क्या यह सब मिलीभगत से, अपने चहते फर्मों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहेंगे या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? यदि समय रहते इस तरह की गड़बड़ियों पर लगाम नहीं लगी तो 15वें वित्त की राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी और गांव का विकास केवल कागजों पर ही सिमटकर रह जाएगा। बता दें कि मामले को लेकर पूर्व में भी खबर प्रकाशित की जा चुकी है लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के चलते सरपंच सचिव के हौसले और भी बुलंद हो गए ओर तय मापदंडों को ठेंगा दिखाते हुए मनमाना भुगतान किया जा रहा है।
