Panchayat Corruption News : 15 वें वित्त में खुला बड़ा घोटाला, बिना ड्राइंग-MB हुए भुगतान—पंचायत सचिव को कलेक्टर का नोटिस…

Rathore Ramshay Mardan
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डिंडौरी। जिला कलेक्टर कार्यालय डिंडौरी ने ग्राम पंचायत कंचनपुर, जनपद पंचायत शहपुरा में मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग के गंभीर मामले में पंचायत सचिव लक्ष्मी प्रसाद यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत और गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

ग्रामीणों ने 2 अगस्त 2025 को नौ बिंदुओं में शिकायत प्रस्तुत की थी, जिसकी जांच के लिए कलेक्टर कार्यालय द्वारा समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताएं और तकनीकी खामियां उजागर की हैं।

जांच में पाया गया कि ज्चाप नाला स्टॉप डेम के निर्माण से संबंधित अभिलेख, माप पुस्तिका, भुगतान एमबी और आवश्यक ड्राइंग प्रस्तुत नहीं की गई। डेम की गुणवत्ता भी निम्न स्तर की पाई गई, जिसमें तकनीकी मानकों के विपरीत मिट्टी के बांध पर ऊपर से कांक्रीट की परत डालकर निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, भुगतान पूर्ण होने से पहले ही स्टॉप डेम के क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई है।

गैबियन स्ट्रक्चर के नाम पर पुराने बांध पर केवल जाली और पीसीसी कंपार्टमेंट बनाकर शासकीय राशि के अपव्यय का मामला सामने आया है, जो तकनीकी मानकों पर खरा नहीं उतरता। वहीं, डुण्डीसरई में पुलिया निर्माण के संबंध में भी कोई आवश्यक दस्तावेज जांच दल को उपलब्ध नहीं कराए गए।

जांच रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि फर्जी हाजिरी के आरोप में मेट पद से हटाए गए व्यक्ति को पृथककरण के बाद भी मजदूरी का भुगतान किया गया। इसके अलावा, जजगंगा संवर्धन अभियान के तहत बने तालाब के बीच श्मशान शेड का होना और स्थल चयन प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर न होना भी गंभीर लापरवाही मानी गई है।

डुण्डीसरई तालाब की स्वीकृत ड्राइंग प्रस्तुत नहीं की गई तथा बंध-वाल से लगातार रिसाव के कारण तालाब के ग्रीष्म ऋतु तक जलरहित होने की आशंका जताई गई है। वहीं, ग्रामसभा की बैठक वर्ष 2025 में केवल एक बार आयोजित होना भी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आया है।

इन सभी तथ्यों के आधार पर कलेक्टर कार्यालय ने पंचायत सचिव को तीन दिवस में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जवाब संतोषजनक न होने की स्थिति में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 एवं पंचायत राज अधिनियम 1993 के तहत एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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