— कोसमी में कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल, आदिवासी परिवारों को न्याय और मुआवजा देने की मांग
भोपाल/ डिंडौरी। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ने लगा है। इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। दोनों नेताओं ने आदिवासी परिवारों के अधिकारों, उनके पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
दरअसल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को संबोधित करते हुए कहा कि केवल बयान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आदिवासी परिवारों के घर उजड़ने के मामले में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आदिवासी परिवारों को उजाड़ने वाले अधिकारियों और व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा। पटवारी ने भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने भी इस मामले में सरकार को घेरते हुए कहा कि आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलने और उनकी मेहनत उजड़ने की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्रीय मंत्री की बात भी नहीं सुनी जा रही, तो आदिवासी परिवार अपनी पीड़ा किसके सामने रखें। मरकाम ने सरकार से मांग की कि आदिवासी परिवारों को बेघर करने के बजाय उन्हें न्याय और सम्मान दिया जाए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोसमी गांव में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घरों और फसलों को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रभावित परिवारों के मामले में नाराजगी जताई और राहत और आवास की व्यवस्था करने की जरूरत बताई। वहीं, संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई से पहले नोटिस दिए जाने की बात कही गई है।
इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही है। अब जांच के निष्कर्षों और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजर है। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को उचित राहत, पुनर्वास और मुआवजा मिले तथा यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मामले ने प्रदेश में आदिवासी अधिकारों, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
