— अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, एजेंडा निर्धारण से लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति जारी करने तक की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने सदस्य सचिव हर्षल पंचोली के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में अध्यक्ष ने 20 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। पत्र की प्रतिलिपि केंद्र और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।
अध्यक्ष के पत्र में SEIAA की बैठकों के एजेंडे तैयार करने, लंबित प्रकरणों को शामिल करने, बैठकों की कार्यवाही निर्धारित समय पर पोर्टल पर अपलोड करने और पर्यावरणीय स्वीकृति पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि इन कार्यों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और शासन की ओर से जांच के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
500 लंबित प्रकरणों के बीच एजेंडा निर्धारण पर सवाल
अध्यक्ष ने SEIAA की 974वीं और 975वीं बैठकों के एजेंडे को लेकर आपत्ति जताई है। पत्र के अनुसार, इन बैठकों के एजेंडे 17 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार के परिवेश पोर्टल पर अपलोड किए गए थे। अध्यक्ष का आरोप है कि एजेंडा तैयार करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पत्र में पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 और भारत सरकार के 4 नवंबर 2008 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रकरणों को निर्धारित कालक्रम के अनुसार एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया है कि मध्य प्रदेश SEIAA में करीब 500 प्रकरण लंबित हैं। ऐसे में कुछ लंबित मामलों को छोड़कर अन्य प्रकरणों को एजेंडे में शामिल किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
SEAC में लंबित मामलों को SEIAA के एजेंडे में शामिल करने का आरोप
पत्र में SEIAA की 974वीं बैठक के एजेंडे में शामिल चार प्रकरणों को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। अध्यक्ष के अनुसार, परिवेश पोर्टल पर ये मामले SEIAA के बजाय राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) में लंबित दर्शाए गए थे। इसके अलावा, डीम्ड पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े मामलों को एजेंडे में शामिल करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अध्यक्ष ने अपने पत्र में पर्यावरणीय स्वीकृति से संबंधित प्रकरणों पर नियमानुसार विचार करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
NGT के आदेश के अनुपालन पर भी उठाए सवाल
मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 3 फरवरी 2026 के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, प्रकरण O.A. No. 31/2026 (CZ) में खनन गतिविधियों के लिए SEIAA की आवश्यक स्वीकृति के बिना अनुमति दिए जाने से संबंधित टिप्पणी का हवाला दिया गया है।
अध्यक्ष का आरोप है कि संबंधित मामलों को SEIAA के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करने के उद्देश्य से 10 फरवरी, 8 मई और 5 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इस पूरे मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के पालन की आवश्यकता जताई है।
बैठकों की कार्यवाही अपलोड करने में देरी का मुद्दा
अध्यक्ष ने बैठकों की कार्यवाही यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग को परिवेश पोर्टल पर अपलोड करने में देरी का मुद्दा भी उठाया है। पत्र में बताया गया है कि SEIAA की 966वीं बैठक 8 सितंबर 2026 को हुई थी, जबकि उसकी कार्यवाही 1 अक्टूबर 2026 को अपलोड की गई। इसी तरह, 965वीं बैठक 18 अगस्त 2026 को आयोजित हुई और उसकी कार्यवाही 5 सितंबर 2026 को अपलोड किए जाने का उल्लेख है।
अध्यक्ष ने इन उदाहरणों के आधार पर निर्धारित समयसीमा के पालन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच कराने की जरूरत बताई है।
पर्यावरणीय स्वीकृति पत्र जारी करने में देरी पर आपत्ति
पत्र में पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान किए जाने के बाद संबंधित स्वीकृति पत्र जारी करने में कथित देरी का मामला भी उठाया गया है। अध्यक्ष के अनुसार, स्वीकृति मिलने के बाद पत्र समय पर जारी किया जाना चाहिए, ताकि आवेदकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने इस प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता जताई है।
मुख्य सचिव से तत्काल कार्रवाई की मांग
शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में सदस्य सचिव हर्षल पंचोली को तत्काल निलंबित करने और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया है। पत्र की प्रतिलिपि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश शासन के पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और SEIAA की सदस्य डॉ. सुनंदा सिंह को भी भेजी गई है।
फिलहाल, इस मामले में शासन की ओर से संभावित कार्रवाई और जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। सदस्य सचिव हर्षल पंचोली का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों की पुष्टि, संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
