डिंडौरी। जिले की करंजिया जनपद पंचायत में पिछले लगभग एक वर्ष से स्थाई मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की पदस्थापना नहीं होने को लेकर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर को एसडीएम और जनपद सीईओ दोनों का प्रभार सौंपा गया है, जिसके चलते जनपद पंचायत के कार्य प्रभावित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रभारी अधिकारियों के पास एक साथ कई जिम्मेदारियां होने के कारण वे जनपद पंचायत को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका असर पंचायत क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा मनमाने तरीके से कार्य करने, समय पर कार्यालय में उपस्थित न रहने और प्रशासनिक लापरवाही जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, स्वच्छता अभियान, सड़क निर्माण और पेयजल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्यों में अपेक्षित गति नहीं दिखाई दे रही है। पंचायतों के नियमित निरीक्षण और योजनाओं की मॉनिटरिंग भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्थाई और सक्रिय सीईओ की नियुक्ति जरूरी बताई जा रही है।
जनपद पंचायत अध्यक्ष राजू सिंह उद्दे ने कहा कि स्थाई सीईओ नहीं होने से जनपद के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर अक्षय डिगरसे को एसडीएम बजाग और करंजिया जनपद पंचायत सीईओ का प्रभार दिया गया है, वहीं उनकी अनुपस्थिति में संयुक्त कलेक्टर भारती मेरावी को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। कई स्थानों का प्रभार होने के कारण अधिकारी जनपद पंचायत करंजिया को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होने से क्षेत्रीय समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है और कुछ अधिकारी-कर्मचारी मनमानी तरीके से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जनपद सदस्यों के साथ कलेक्टर को भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जल्द योग्य एवं स्थाई अधिकारी की पदस्थापना करने की मांग की है, ताकि विकास कार्यों में तेजी आए और आम जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।




