डिंडौरी। ग्राम पंचायत कंचनपुर-माल और ग्राम डुण्डीसरई में कराए गए निर्माण व विकास कार्यों में व्यापक अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है। ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर कलेक्टर डिंडौरी ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया था। यह दल मौके पर पहुंचा और विभिन्न निर्माण कार्यों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। दल ने विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर को सौंप दिया है, जिसमें कई गंभीर कमियाँ, लापरवाहियाँ और दस्तावेजी गड़बड़ियाँ सामने आई हैं।
— ये रहा पूरा मामला
जांच रिपोर्ट के अनुसार ज्वाप नाला निर्माण से जुड़े अभिलेख, माप-पुस्तिका और भुगतान संबंधी दस्तावेज पंचायत द्वारा प्रस्तुत ही नहीं किए गए, जिसके कारण इस कार्य की गुणवत्ता और भुगतान का सत्यापन नहीं हो सका। स्टॉप-डैम निर्माण में भी भारी अनियमितताएँ मिलीं। स्वीकृत ड्राइंग उपलब्ध नहीं कराई गई थी और निर्माण में तकनीकी मानकों का पालन नहीं हुआ। निरीक्षण में पाया गया कि बंध पर मिट्टी भरकर सीधे कंक्रीट की छपाई कर दी गई थी, जो किसी भी इंजीनियरिंग मानक के अनुरूप नहीं है। निर्माण पूरा दिखाकर केवल मजदूरी भुगतान कर दिया गया, जबकि संरचना कई जगहों से पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
गैबियन संरचना में भी फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। मानक गैबियन जहाँ इस्पात तार के बॉक्स और मजबूत बोल्डर से बनाए जाते हैं, वहीं यहां सिर्फ जाली डालकर और पीसीसी के छोटे-छोटे कंपार्टमेंट बनाकर कार्य पूरा दिखा दिया गया। रिपोर्ट में इसे सीधे-सीधे शासकीय धन का अपव्यय बताया गया है। इसी प्रकार ग्राम डुण्डीसरई में बनी पुलिया के बारे में भी पंचायत कोई ड्राइंग-डिजाइन, माप-तौल और भुगतान अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे निर्माण की गुणवत्ता की पुष्टि ही संभव नहीं हो सकी।
एक गंभीर मामला मेट राजेंद्र आर्मी का भी सामने आया है। पंचायत ने पूर्व में फर्जी हाजिरी भरने पर उसे कार्य से पृथक कर दिया था, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि हटाए जाने के बाद भी उसे मजदूरी भुगतान होता रहा। तालाब निर्माण में भी बड़े स्तर की गड़बड़ी दर्ज की गई है। जल-गंगा अभियान के तहत बनाए गए तालाब का चयन बिना ग्राम सभा की सही स्वीकृति के किया गया। तालाब का डूब क्षेत्र निजी भूमि पर पाया गया, जिससे शमशान घाट का शेड भी पानी में आ गया। पास ही उपलब्ध कम ऊंचाई वाले वैकल्पिक स्थल को नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि वहाँ एक पुराना स्टॉप-डैम पहले से मौजूद था।
ग्राम डुण्डीसरई के तालाब में बंध-वाल से पानी रिसते हुआ पाया गया, जिसके कारण संभावना जताई गई है कि गर्मी तक तालाब पूरी तरह खाली हो सकता है। निर्माण से संबंधित स्वीकृत ड्राइंग यहाँ भी उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं सरपंच-सचिव द्वारा स्वयं के खाते में राशि जमा कराने के आरोप की जांच में स्पष्ट हुआ कि केवल 3,660 रुपये की प्रतिपूर्ति राशि उनके खाते में गई थी, जबकि शेष देय राशि अभी लंबित है। अतः यह आरोप निराधार पाया गया।
ग्राम सभा के नियमित आयोजन न होने की शिकायत भी सही पाई गई। पंचायत की कार्यवाही पंजी में दर्ज अंतिम ग्राम सभा 14 अप्रैल 2025 को आयोजित हुई थी। जांच दल ने सभी तथ्यों सहित विस्तृत प्रतिवेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। अब जिला प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा है।




