भोपाल। प्रदेश सरकार ने पंचायत सचिवों के हित में एक के बाद एक महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए उनके सशक्तिकरण का संकल्प दोहराया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पंचायत सचिव ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं और शासन उनकी भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार द्वारा पंचायत सचिवों की सेवा आयु-सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। इसके साथ ही उन्हें सातवां वेतनमान, अतिरिक्त भत्ते और समयमान वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है। सेवा के दौरान पंचायत सचिव के निधन की स्थिति में ₹1.50 लाख की वसूली को समाप्त कर दिया गया है, जिससे उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि संविलियन से जुड़ी प्रक्रियाओं और लंबे समय से लंबित मामलों पर अब तेजी से निर्णय लिए जा रहे हैं। शासन का उद्देश्य है कि पंचायत सचिवों को स्थायित्व और सुरक्षा मिले, जिससे वे बिना दबाव के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
पंचायतों को अधिक सक्षम बनाने के लिए सरकार द्वारा अधिकारों का विस्तार, अधोसंरचना का विकास, नियमित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इससे शासन की योजनाएं गांव-गांव तक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि पंचायत सचिवों के हित, सम्मान और सुरक्षा के लिए सरकार हर आवश्यक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि मजबूत पंचायत सचिव व्यवस्था से ही सशक्त पंचायतें और आत्मनिर्भर गांव बनेंगे।
