डिंडौरी। न पानी है, न इलाज… मजदूरी भी समय पर नहीं मिलती, आखिर जाएं तो जाएं कहां..? — यही दर्द लेकर जिले के बैगा बाहुल्य ग्राम चांडा के ग्रामीण सोमवार सुबह सड़क पर उतर आए। चांडा तिराहे पर शहडोल-रायपुर स्टेट हाईवे पर चक्का जाम कर ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा को आवाज दी।
सुबह से ही महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर सड़क पर बैठ गए। कोई पानी के लिए तरस रहा है तो कोई अपनी मजदूरी का हिसाब मांग रहा था। गुस्से और बेबसी के बीच हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह थम गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने चार दिन पहले ही एसडीएम बजाग और थाना बजाग को अपनी समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा।
धरने में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा की मजदूरी महीनों से अटकी हुई है, गर्मी में पानी के लिए भटकना पड़ रहा है, नेटवर्क नहीं होने से काम प्रभावित हो रहा है और अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से समय पर इलाज भी नहीं मिल पाता। बीमार होने पर हमें कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, कभी-कभी तो रास्ते में ही हालत बिगड़ जाती है। एक ग्रामीण ने दर्द बयां किया।
इतना ही नहीं, पशु चिकित्सालय हमेशा बंद रहता है, पंचायत भवन जर्जर हो चुका है, एंबुलेंस की सुविधा नहीं है और ग्राम पंचायत में स्थायी सचिव भी नहीं है। इन तमाम समस्याओं ने ग्रामीणों का जीवन कठिन बना दिया है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि मजदूरी का समय पर भुगतान नहीं होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक ग्रामीण अपनी मांगों पर डटे हुए हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इन ग्रामीणों की आवाज कब तक सुनी जाएगी और कब उनकी समस्याओं का समाधान होगा।





