भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के कोष एवं लेखा आयुक्त कार्यालय ने प्रदेश के समस्त नियमित एवं गैर-नियमित कर्मचारियों के वेतन भुगतान को समयबद्ध और सुचारू बनाने के लिए केन्द्रीकृत वेतन प्रोसेसिंग (Centralised Pay Processing) व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा समस्त विभागाध्यक्षों, संभागीय आयुक्तों, जिलाध्यक्षों एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
वर्तमान व्यवस्था में आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा FMIS के पेरोल मॉड्यूल से वेतन जनरेट कर कोषालय में देयक प्रस्तुत किए जाते हैं। शासन के संज्ञान में आया है कि कई स्थानों पर पेरोल जनरेशन समय-सीमा में नहीं हो पा रही है, जिससे वेतन भुगतान में विलंब की स्थिति बनती है। जबकि मध्यप्रदेश कोषालय संहिता 2020 के अनुसार प्रत्येक माह की 20 तारीख से वेतन देयक कोषालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए IFMIS के माध्यम से केन्द्रीकृत वेतन प्रोसेसिंग सुविधा विकसित की गई है। नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक DDO को अलग-अलग पेरोल जनरेट करने की आवश्यकता नहीं होगी। आवश्यक संशोधन कर सीधे देयक लगाए जा सकेंगे, जिससे वेतन आहरण की प्रक्रिया तेज और समयबद्ध हो सकेगी।
शासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था दिसंबर 2025 के वेतन से लागू होगी, जिसका भुगतान जनवरी 2026 में किया जाएगा। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अंतर्गत कार्यरत समस्त DDO को केन्द्रीकृत वेतन प्रोसेसिंग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराएं, ताकि कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 1 तारीख को समय पर वेतन मिल सके।
