भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग मध्यप्रदेश ने eHRMS पोर्टल पर e-Attendance मॉड्यूल के शत-प्रतिशत उपयोग को लेकर सभी कार्यालय प्रमुखों और आहरण संवितरण अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त शुक्ला ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि विभागीय अमले और सभी शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से फेस रिकग्निशन आधारित ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य है।
विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार 1 दिसंबर 2025 की स्थिति में मात्र 56% शैक्षणिक अमले की ही ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर मानी गई है और इसे अनुशासनहीनता और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना गया है।
आयुक्त ने सभी कार्यालय प्रमुखों व आहरण संवितरण अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अपने अधीनस्थ सभी शैक्षणिक कर्मचारियों का 100% ऑन-बोर्डिंग सुनिश्चित करें और प्रतिदिन की उपस्थिति e-Attendance ऐप के माध्यम से ही दर्ज कराएं। आदेश में कहा गया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कार्यालय प्रमुख, एडीओ और लोकसेवक के विरुद्ध मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उधर, e-Attendance में आ रही दिक्कतों को लेकर शासकीय शिक्षक संगठन के जिला अध्यक्ष राम कुमार गर्ग पूर्व में ही डिंडौरी कलेक्टर को पत्र लिखकर तकनीकी समस्याओं व मैदानी कठिनाइयों से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने मांग की थी कि शिक्षकों को मानसिक दबाव में रखने के बजाय तकनीकी खामियों का निराकरण कर व्यवस्था को सरल व व्यवहारिक बनाया जाए। वहीं विभाग के नए निर्देशों के बाद अब सभी शिक्षण संस्थानों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ने की उम्मीद है।




