भोपाल: लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश ने स्पष्ट किया है कि समग्र शिक्षा अभियान में शिक्षक संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवाएँ लेने की कार्यवाही अब प्रतिनियुक्ति की श्रेणी में नहीं मानी जाएगी। संचालनालय ने आदेश जारी कर कहा है कि प्रतिनियुक्ति शब्द के प्रयोग से सेवा शर्तों में भ्रम की स्थिति बन रही थी, इसलिए अब इस प्रक्रिया में प्रतिनियुक्ति का उपयोग नहीं किया जाएगा।
आदेश में कहा गया है कि समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत विकासखण्ड स्रोत समन्वयक, जिला व विकासखण्ड अकादमिक समन्वयक, जनशिक्षक आदि पदों पर शिक्षकों की सेवाएँ ली जाती हैं। वापसी उपरांत इनका शाला आंबटन अब जिला कलेक्टर के अनुमोदन से किया जाएगा। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी को अधिकृत किया गया है, जो उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर एजुकेशन पोर्टल 3.0 से ऑनलाइन आदेश जारी करेंगे।
निर्देशों के अनुसार शाला आंबटन सर्वाधिक आवश्यकता वाली शालाओं में पारदर्शी तरीके से होगा। सर्वाधिक आवश्यकता का निर्धारण विद्यालय में नामांकन, स्वीकृत पदों और कार्यरत शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए किया जाएगा।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जो शिक्षक समग्र शिक्षा अभियान या प्रौढ़ शिक्षा कार्यालय में कार्यरत हैं और उनकी जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर अपडेट नहीं है, उन्हें तत्काल अपडेट किया जाए। ऐसे शिक्षकों का वेतन उसी पद से आहरित होगा जिस पद पर उनकी सेवाएँ ली जा रही हैं। बता दें कि जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 10 सितम्बर 2025 के बाद इस संबंध में जारी कोई भी ऑफलाइन आदेश मान्य नहीं होगा और सभी कार्यवाही पोर्टल के माध्यम से ही की जाएगी।




