मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षक आवश्यकता से अधिक तैनात हैं, जबकि आदिवासी बाहुल्य ग्रामीण इलाकों के विद्यालय आज भी शिक्षक विहीन हैं। डिंडौरी कस्बे के स्कूलों में मात्र 25–30 बच्चों पर तीन से चार शिक्षक मौजूद हैं, लेकिन करंजिया विकासखंड के नवीन माध्यमिक विद्यालय बिजौरी जैसे ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है।
नवीन माध्यमिक विद्यालय बिजौरी की स्थिति चिंताजनक है। यहाँ प्राथमिक स्तर पर केवल दो शिक्षक हैं, जबकि माध्यमिक स्तर पर एक भी शिक्षक नहीं है। अतिशेष शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के बाद बमुश्किल दो शिक्षक तैनात हुए थे, लेकिन हाल ही में जनजातीय कार्य विभाग, भोपाल द्वारा आदेश निरस्त किए जाने के कारण विद्यालय पुनः शिक्षक विहीन हो गया।
आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में शैक्षणिक असंतुलन को दूर करने के लिए कलेक्टर नेहा मारव्या ने अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण कर गाँव के स्कूलों में शिक्षक भेजे थे। हालांकि राजनीतिक दबाव और विरोध के चलते यह व्यवस्था ठप पड़ गई। अब यह सवाल उठता है कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और ग्रामीण विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी।




