मध्यप्रदेश सरकार और प्रशासन विकास की बड़ी-बड़ी घोषणाएं भले ही करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहगांव के पोषक ग्राम मौहरी टोला में आज भी सड़क का नामोनिशान नहीं है। यहां के ग्रामीण 21वीं सदी में भी खटिया पर मरीज ढोने को मजबूर हैं।
शुक्रवार को इसी गांव के लकवा पीड़ित दीप सिंह को ग्रामीणों ने खटिया पर लादकर कीचड़ भरे रास्तों से 3 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया। कारण साफ है—गांव तक न सड़क है, न ही एंबुलेंस पहुंच सकती है।
20 परिवार, लेकिन सुविधाएं शून्य
मौहरी टोला में करीब 20 परिवार रहते हैं। गांव मुख्य सड़क से लगभग साढ़े तीन किलोमीटर अंदर है। बरसात में कीचड़ से रास्ता इतना खराब हो जाता है कि बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीण यशवंत परस्ते ने बताया, “छोटे भाई दीप सिंह को लकवा लग गया। वाहन गांव तक नहीं पहुंच सकते, इसलिए खटिया पर ले जाना पड़ा।” ग्रामीणों का कहना है कि टोला में न स्कूल है, न आंगनबाड़ी। बच्चे डेढ़ किलोमीटर दूर लपटी टोला या दो किलोमीटर दूर बम्हनी गांव जाकर पढ़ाई करते हैं। बारिश में हफ्तों तक पढ़ाई ठप हो जाती है।
गुहार बेअसर, सर्वे के बाद भी निर्माण अधर में
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए ग्राम पंचायत से लेकर जनसुनवाई और कलेक्ट्रेट तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्राम पंचायत सचिव देव सिंह ठाकुर का कहना है कि समस्या पुरानी है। गर्मियों में प्रधानमंत्री सड़क योजना के अधिकारी सर्वे करने आए थे, लेकिन काम की शुरुआत अब तक नहीं हो पाई है।
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