— विशेष न्यायालय ने विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा, सह-अभियुक्त दोषमुक्त
डिंडौरी। नाबालिग को उसकी विधिपूर्ण संरक्षक की सहमति के बिना ले जाने और उसके साथ लैंगिक अपराध करने के मामले में डिंडौरी स्थित विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी को विभिन्न धाराओं में कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में एक अन्य आरोपी को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया।
मीडिया सेल प्रभारी अभियोजन अधिकारी दिलावर धुर्वे ने बताया कि थाना डिंडौरी में अपराध क्रमांक 335/2025 दर्ज किया गया था। प्रकरण में डिंडौरी थाना क्षेत्र अंतर्गत नीलेश विश्वकर्मा और अभिषेक पुषाम को आरोपी बनाया गया था। पुलिस द्वारा विवेचना पूरी करने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन के अनुसार 25 मई 2025 को नाबालिग पीड़िता को उसकी विधिपूर्ण संरक्षक की सहमति के बिना ले जाने का आरोप था। प्रकरण की विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर अपहरण, परिरोध तथा नाबालिग से संबंधित लैंगिक अपराधों की धाराओं में अभियोजन प्रस्तुत किया गया।
विशेष न्यायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, जिला डिंडौरी ने आरोपी नीलेश विश्वकर्मा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) में 3 वर्ष, धारा 87 में 5 वर्ष, धारा 64(2)(i) में 10 वर्ष तथा धारा 127(2) और 351(3) में 1-1 वर्ष के कठोर कारावास एवं संबंधित अर्थदंड से दंडित किया है।
वहीं सह-अभियुक्त अभिषेक पुषाम को भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के आरोपों से न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन विभाग के अनुसार मामले में पुलिस द्वारा संकलित साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष रखा, जिसके बाद न्यायालय ने मुख्य आरोपी के विरुद्ध दोषसिद्धि करते हुए सजा सुनाई है।
