— रिश्तेदार सरपंच-उपसरपंच होने पर अनिवार्य होगा ट्रांसफर, महिला सचिवों को अंतर-जिला संविलियन की सुविधा
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण और अंतर-जिला संविलियन को लेकर नई नीति लागू कर दी है। 9 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार अब पंचायत सचिवों के तबादले सामान्य प्रशासन विभाग की स्थानांतरण नीति-2026 के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार किए जाएंगे। शासन के इस फैसले से प्रदेशभर के हजारों पंचायत सचिव प्रभावित होंगे।
नई व्यवस्था के तहत 1 जून से 15 जून 2026 तक जिले के भीतर ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण की प्रक्रिया जिला कलेक्टर की अनुशंसा एवं प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद पूरी होगी, जबकि आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे।
शासन ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्राम पंचायतों में सचिव के नजदीकी रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हुए हैं, वहां पदस्थ सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य होगा। इसके अलावा किसी सचिव को उसके पैतृक गांव अथवा ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जाएगा। वहीं जो सचिव एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं, उन्हें भी स्थानांतरित किया जाएगा। शासन का मानना है कि इससे पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी।
आदेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि सामान्य स्थानांतरण अवधि समाप्त होने अथवा प्रतिबंध अवधि लागू होने के बाद भी विशेष परिस्थितियों में तबादले किए जा सकेंगे। न्यायालय के आदेशों का पालन, गंभीर शिकायतें, विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई, लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो या पुलिस द्वारा दर्ज आपराधिक मामलों में संबंधित सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
महिला ग्राम पंचायत सचिवों को भी नई नीति में विशेष राहत दी गई है। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला सचिव अपने पति या ससुराल के जिले में अंतर-जिला संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी। इसी प्रकार अनुकंपा नियुक्त सचिवों को भी अपने गृह जिले में संविलियन की सुविधा मिलेगी। हालांकि यह सुविधा पूरे सेवाकाल में केवल एक बार ही प्रदान की जाएगी।
संविलियन के लिए इच्छुक सचिवों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। रिक्त पद उपलब्ध होने और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद आयुक्त पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। संविलियन के बाद संबंधित सचिव का नाम नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नई स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत बनाया जा सके।




