— जांच में दोषी बताए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
डिंडौरी। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर के उपसरपंच विश्राम सिंह मरावी एवं ग्रामीणों ने कलेक्टर डिण्डौरी को शिकायत सौंपकर ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि पूर्व में हुई जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद सात माह बीत जाने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
— ये रहा पूरा मामला
दरअसल शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि 2 सितंबर 2025 को कलेक्टर जनसुनवाई में पंचायत के कार्यों में कथित भ्रष्टाचार संबंधी 9 बिंदुओं पर शिकायत की गई थी। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जिला स्तरीय जांच समिति गठित कर जांच कराई गई, जिसमें सरपंच और सचिव को पुनः दोषी पाया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इससे पहले भी जिला पंचायत द्वारा लगभग 5.65 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया गया था, जिस पर संबंधित पक्ष ने उच्च न्यायालय से आंशिक राशि जमा करने की शर्त पर स्थगन प्राप्त कर लिया था।
उपसरपंच का आरोप है कि न्यायालय से मिले स्थगन का दुरुपयोग करते हुए सरपंच और सचिव द्वारा पुनः अनियमितताएं की गईं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 15 मई 2026 को पंचायत क्षेत्र के एक तालाब को फोड़कर पानी निकाला गया, जिसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा बंद कराई गई पंचायत की डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) को बिना सक्षम आदेश के जनपद पंचायत शहपुरा के सीईओ द्वारा पुनः चालू करा दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश तक डीएससी को पुनः बंद कराया जाए।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूर्व में की गई शिकायतों एवं जांच प्रतिवेदनों के आधार पर पंचायत के निर्माण कार्यों के भुगतान पर रोक लगाई जाए, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 के तहत कार्रवाई करते हुए सरपंच को पद से पृथक किया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिकायत के बाद अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक सरपंच, सचिव एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था।




