डिंडौरी। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष एवं जिला संयोजक डिंडौरी राम कुमार गर्ग ने भारत के प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कार्यरत शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से मुक्त किए जाने की मांग उठाई है।
पत्र में बताया गया है कि जन शिक्षा अधिनियम 2009 के तहत तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा वर्ष 2017 में अधिनियम में संशोधन कर शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई थी, जिसके अंतर्गत सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके बावजूद कार्यरत शिक्षकों को टीईटी परीक्षा के दायरे में लाया जा रहा है, जिसे शिक्षक संगठन ने नियम विरुद्ध और अन्यायपूर्ण बताया है।
राम कुमार गर्ग ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि जन शिक्षा अधिनियम में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन गलत व्याख्या करते हुए शिक्षकों पर परीक्षा का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों के हित में राजपत्र के अनुसार पक्ष रखा जाए और अध्यादेश लाकर कार्यरत शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से मुक्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को जबरन टीईटी परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल करना न्यायसंगत नहीं है। इससे शिक्षकों में असंतोष का वातावरण बन रहा है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के स्थानीय आह्वान पर डिंडौरी जिले सहित प्रदेश के कई शिक्षकों ने भी प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर टीईटी परीक्षा से राहत देने की मांग की है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार को शिक्षकों के हित में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।




