—₹92.16 लाख की संपत्ति और खर्च का हिसाब नहीं दे पाया तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक, 122 फर्जी किसानों के नाम पर खाद वितरण में हेराफेरी का आरोप
मध्यप्रदेश के सतना जिले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति और खाद वितरण में बड़े पैमाने पर कथित घोटाले के मामले में सेवा सहकारी समिति अमकुई के तत्कालीन प्रभारी समिति प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ दो अलग-अलग FIR दर्ज कर कार्रवाई की है। EOW की जांच और छापे की कार्रवाई में आरोपी की वैध आय से 426 प्रतिशत अधिक संपत्ति एवं व्यय का खुलासा हुआ है। वहीं, खाद वितरण में फर्जी किसानों के नाम पर हेराफेरी और कालाबाजारी के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
EOW की जांच के अनुसार, आरोपी सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल की नियुक्ति वर्ष 2006 में विक्रेता के पद पर हुई थी। वर्ष 2020 में उन्हें प्रभारी समिति प्रबंधक बनाया गया। जनवरी 2007 से सितंबर 2025 तक की जांच अवधि में उनकी कुल वैध आय 17 लाख 51 हजार 50 रुपये पाई गई। इसके मुकाबले उनके द्वारा किए गए व्यय और अर्जित संपत्ति का कुल मूल्य 92 लाख 16 हजार 174 रुपये सामने आया। इसमें 57 लाख 68 हजार 622 रुपये का प्रारंभिक व्यय, 22 लाख 50 हजार रुपये मूल्य के भूमि दस्तावेज और 11 लाख 97 हजार 552 रुपये के स्वर्ण आभूषण शामिल हैं। इस तरह संपत्ति और व्यय उनकी वैध आय से लगभग 426 प्रतिशत अधिक पाए गए।
छापे में जमीन, सोना और महंगे वाहनों का खुलासा
EOW की छापेमारी एवं सत्यापन के दौरान आरोपी से संबंधित 22.50 लाख रुपये की जमीन के दस्तावेज, करीब 11.97 लाख रुपये के सोने के आभूषण, छह बैंक खाते और छह बीमा पॉलिसियों की जानकारी मिली है। जांच में हुंडई क्रेटा, मारुति विटारा ब्रेजा, महिंद्रा ट्रैक्टर, बुलेट और पैशन प्रो सहित कई महंगे वाहनों की खरीद का भी खुलासा हुआ है।
इसके अलावा नागौद क्षेत्र में करीब 2200 वर्गफीट में निर्मित आलीशान पक्के मकान और पुत्र की दिल्ली में पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों की विस्तृत जांच अभी जारी है।
खाद वितरण में 122 फर्जी किसानों के नाम पर हेराफेरी
आय से अधिक संपत्ति के मामले के साथ ही EOW ने खाद वितरण में कथित धोखाधड़ी और कालाबाजारी को लेकर भी अलग अपराध दर्ज किया है। जांच के अनुसार, सेवा सहकारी समिति अमकुई में पदस्थ रहते हुए आरोपी ने शासन द्वारा निर्धारित यूरिया की दर 593 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर किसानों से 600 रुपये प्रति क्विंटल वसूल किए। इससे किसानों से निर्धारित दर से अधिक राशि लेने और अवैध लाभ कमाने का आरोप है।
जांच में POS मशीन में कुल 194 किसानों का विवरण दर्ज पाया गया, जिनमें से 122 किसानों के नाम फर्जी होने की बात सामने आई है। आरोप है कि इन फर्जी नामों का इस्तेमाल कर खाद की कालाबाजारी की गई। इसके अलावा वास्तविक किसानों के परमिट और रसीदों की कार्बन प्रतियों में काट-छांट कर 10 से 20 बोरी यूरिया एवं डीएपी अतिरिक्त दर्ज किए गए और ऋण समायोजन कराया गया। इस काम में परमिट बुक क्रमांक 12432, 12652 और 12653 सहित अन्य दस्तावेजों में हेराफेरी तथा फर्जी स्टॉक रजिस्टर तैयार किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
दो अलग-अलग FIR दर्ज, जांच जारी
EOW रीवा इकाई ने दोनों मामलों में अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में FIR क्रमांक 110/2026 दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(b) के तहत कार्रवाई की गई है।
वहीं खाद वितरण में कूटरचना, धोखाधड़ी और कालाबाजारी के मामले में FIR क्रमांक 111/2026 दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 318(4), 338 और 336(3) सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(c), 13(1)(a) और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
EOW द्वारा आरोपी के बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और अन्य संपत्तियों की जांच जारी है। इस कार्रवाई से सहकारी समिति में खाद वितरण की व्यवस्था और किसानों के नाम पर किए गए कथित फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
