— कक्षा 9वीं से 12वीं तक हर साल ₹12 हजार की सहायता, पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिलाने पर होगा मंथन
भोपाल। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से 14 अक्टूबर को भोपाल में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में पात्र विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति का लाभ समय पर पहुंचाने, आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और सत्यापन में होने वाली देरी दूर करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जानकारी के अभाव, आवेदन में त्रुटियों अथवा दस्तावेजों के सत्यापन में देरी के कारण कोई भी पात्र एवं मेधावी विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए अधिकारियों और शिक्षकों को योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, ऑनलाइन आवेदन, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीयन तथा संस्थान एवं जिला स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही, विद्यालयों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
चार वर्षों में मिल सकती है 48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति
राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने से रोकना और माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को निर्धारित पात्रता और नवीनीकरण की शर्तें पूरी करने पर कक्षा नौवीं से बारहवीं तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है। इस तरह चार वर्षों में विद्यार्थी अधिकतम 48 हजार रुपये की सहायता प्राप्त कर सकते हैं। छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है।
आय और अंकों के आधार पर तय होगी पात्रता
योजना के तहत विद्यार्थी के अभिभावकों की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही कक्षा सातवीं में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को निर्धारित अंकों में पांच प्रतिशत की छूट दी जाती है। विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से मानसिक योग्यता परीक्षण और शैक्षिक अभिरुचि परीक्षण के आधार पर किया जाता है। योजना के लिए शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त और स्थानीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी पात्र होते हैं।
आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया पर होगा विशेष फोकस
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में पात्रता निर्धारण, चयन प्रक्रिया, ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन भरने, दस्तावेजों की जांच और निर्धारित समय-सीमा में सत्यापन पूरा करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। जिलों से आने वाले नोडल अधिकारियों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि पात्र विद्यार्थियों के आवेदन समय पर पूरे हों और छात्रवृत्ति वितरण में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल
कार्यशाला में भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार ए. श्रीजा (आईईएस), संचालक श्रीकला पी. वेणुगोपाल सहित योजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सहभागिता करेंगे। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न जिलों के नोडल अधिकारियों की भी मौजूदगी रहेगी। योजना का लाभ प्राप्त कर अपने भविष्य को नई दिशा देने वाले विद्यार्थियों को भी अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उनके अनुभवों के माध्यम से योजना की उपयोगिता और विद्यार्थियों की शिक्षा में इसके योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।

