— रीवा संभाग के संयुक्त संचालक लोक शिक्षण ने जारी किया आदेश, सतना और मैहर जिले के कर्मचारियों की बदली पदस्थापना
मध्यप्रदेश के लोक शिक्षण विभाग में लिपिक संवर्ग के 29 लोक सेवकों को सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति दी गई है। रीवा संभाग के संयुक्त संचालक लोक शिक्षण कार्यालय द्वारा जारी आदेश में पदोन्नत कर्मचारियों की नवीन पदस्थापना भी निर्धारित की गई है।
— जारी आदेश के अनुसार
दरअसल जारी आदेश के अनुसार, कर्मचारियों को अस्थायी रूप से अन्य कार्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में पदस्थ किया गया है।
जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि इससे पहले 10 जुलाई 2026 को सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर अस्थायी पदोन्नति प्रदान की गई थी। अब पदोन्नति के बाद 29 कर्मचारियों को उनके नाम के सामने उल्लेखित नवीन कार्यालयों एवं संस्थानों में पदस्थ किया गया है।
सतना और मैहर में होगी नई पदस्थापना
आदेश के अनुसार, पदोन्नत कर्मचारियों में बाबूलाल कोल को विकासखंड शिक्षा अधिकारी उचेहरा, विजेन्द्र सिंह और सतीश कुमार चक्रवर्ती को विकासखंड शिक्षा अधिकारी मझगवां, प्रभात कुमार वर्मा को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रैहिकवारा तथा नीलेश कुमार वर्मा को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरहना कोठी में पदस्थ किया गया है।
इसी तरह के.के. पाण्डेय को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चोरहटा, योगेश कुमार गर्ग को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिजहटा तथा आशुतोष कुमार नामदेव को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हाटी में पदस्थापना दी गई है। अन्य कर्मचारियों को भी सतना और मैहर जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में नवीन जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के तहत दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए होगी। पदोन्नति आदेश सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका क्रमांक 13954/2016 तथा भविष्य में सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा पारित होने वाले आदेशों के अधीन रहेगा।
मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार, कर्मचारियों को आदेश प्राप्त होने की तारीख से एक माह के भीतर वेतन निर्धारण संबंधी विकल्प प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, पदभार ग्रहण कराने से पहले कर्मचारियों की सेवा अभिलेखों के आधार पर पात्रता का परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी 15 कार्य दिवसों की निर्धारित अवधि में नवीन पदस्थापना वाले कार्यालय या संस्था में पदभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।




