Forest Transfer News : डिंडौरी में क्या बदला..? मध्यप्रदेश वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, IFS व SFS के 47 अधिकारी बदले….

Rathore Ramshay Mardan
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भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग में प्रशासनिक स्तर पर व्यापक फेरबदल किया गया है। मंत्रालय, वल्लभ भवन भोपाल से 7 जनवरी 2026 को जारी दो अलग–अलग आदेशों के माध्यम से भारतीय वन सेवा (आईएफएस) और राज्य वन सेवा (एसएफएस) के कुल 47 अधिकारियों के स्थानांतरण किए गए हैं। शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह सभी तबादले प्रशासकीय आधार पर अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

जारी आदेश के अनुसार भारतीय वन सेवा के 27 अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, उप वन संरक्षक तथा वनमंडलाधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यालय भोपाल में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर पदस्थ किया गया है, जबकि अनेक अधिकारियों को विभिन्न वन वृत्तों, टाइगर रिजर्व, मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम और राज्य लघु वनोपज संघ में नई जिम्मेदारी दी गई है। संजय टाइगर रिजर्व, कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी अधिकारियों के तबादले किए गए हैं।

 

इसी क्रम में राज्य वन सेवा के प्रवर श्रेणी वेतनमान में कार्यरत 20 अधिकारियों का भी स्थानांतरण किया गया है। इनमें से कई अधिकारियों को प्रभारी वनमंडलाधिकारी बनाया गया है, वहीं कुछ अधिकारियों को मैदानी वनमंडलों में भेजा गया है। कुछ को राज्य वन विकास निगम, राज्य लघु वनोपज संघ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय भोपाल में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया गया है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व, सामाजिक वानिकी तथा अनुसंधान एवं विस्तार इकाइयों में भी बदलाव किए गए हैं।

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DOC-20260107-WA0033.(1)

DOC-20260107-WA0033.

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस प्रशासनिक फेरबदल का मुख्य उद्देश्य वन संरक्षण, वन्यप्राणी प्रबंधन, अनुसंधान, उत्पादन एवं प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाना है। नई पदस्थापना के बाद वनमंडलों और संरक्षित क्षेत्रों में बेहतर समन्वय, निगरानी और कार्य निष्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों आदेश मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से जारी किए गए हैं और अपर सचिव, वन विभाग द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित हैं। वन विभाग में लंबे समय बाद किए गए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका सीधा असर प्रदेश के वन प्रबंधन और संरक्षण गतिविधियों पर दिखाई देगा।

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