IFMIS पोर्टल में गलत एरियर एंट्री, फर्जी भुगतान और नियमों के उल्लंघन का आरोप; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज
डिंडौरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी राशि के भुगतान में कथित अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को प्राप्त शिकायत की जांच के बाद डिंडौरी के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) समेत छह लोगों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया है। मामले में कुल 60.60 लाख रुपये की शासकीय राशि के कथित अवैध एवं दोहरे भुगतान का आरोप है। प्रकरण अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।
प्रेस नोट के अनुसार, आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इन छह लोगों के विरुद्ध दर्ज हुआ मामला
प्रेस नोट में जिन लोगों को आरोपी बताया गया है, उनमें तत्कालीन CMHO डिंडौरी आर.के. मेहरा, तत्कालीन CMHO रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन DPM बलवंत सिंह भावती, तत्कालीन DPM भारत सिंह टेकाम, सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू और सुपरवाइजर प्रकाश परस्ते के नाम शामिल हैं।
IFMIS पोर्टल पर गलत एंट्री कर भुगतान का आरोप
EOW की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपियों पर IFMIS पोर्टल में गलत एरियर गणना पत्रक तैयार करने, पात्रता से अधिक राशि दर्ज करने, फर्जी प्रविष्टियां करने और ऐसे भुगतान स्वीकृत कराने के आरोप हैं, जिनका कोई वैधानिक आधार नहीं पाया गया।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि बिना उचित कार्यालयीन अभिलेखों और सक्षम आदेशों के एरियर की राशि की प्रविष्टियां की गईं। कुछ मामलों में पूर्व में मैन्युअल रूप से भुगतान की जा चुकी राशि की दोबारा एंट्री कर भुगतान लेने का भी आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
49.89 लाख रुपये के एरियर भुगतान में गड़बड़ी
प्रेस नोट में उल्लेख है कि IFMIS पोर्टल में गलत प्रविष्टियों के जरिए एरियर के रूप में 49.89 लाख रुपये का कथित अवैध भुगतान किया गया। इसके अलावा, बिना वैधानिक आदेश के नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस और गृह भाड़ा भत्ते के मद में 5.89 लाख रुपये के अतिरिक्त भुगतान का भी आरोप है।
वहीं, सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू को जुलाई 2024 में जुलाई 2017 के बाद के एरियर भुगतान के लिए ‘After July 2017 Arrear Screen’ का उपयोग कर 4.78 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का उल्लेख है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह भुगतान बिना उचित कार्यालयीन आदेश और संगत दस्तावेजों के किया गया। उस समय गुलाब प्रसाद साहू स्वयं लेखा शाखा के प्रभारी थे। उनके विरुद्ध भंडार को दी जाने वाली राशि के दोहरे या गलत भुगतान का आरोप भी सामने आया है।
सरकारी राशि को निजी खातों में पहुंचाने का आरोप
EOW के प्रेस नोट के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर पात्रता संबंधी नियमों की अनदेखी करते हुए बिलों को डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृत किया, जिसके बाद सरकारी राशि लाभार्थियों या संबंधित बैंक खातों में स्थानांतरित हुई। जांच एजेंसी ने इसे शासकीय धन के दुरुपयोग और वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है।
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। कुल 60.60 लाख रुपये के कथित अवैध एवं दोहरे भुगतान को लेकर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
अब आगे की जांच पर नजर
मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब विवेचना के दौरान भुगतान संबंधी दस्तावेजों, IFMIS पोर्टल की प्रविष्टियों, स्वीकृतियों और संबंधित बैंक खातों की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। मामले में न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाएंगे।
