डिंडौरी। रबी फसल की बोनी की तैयारी कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने रबी वर्ष 2026-27 के लिए चना और मसूर के प्रमाणित बीज पर अनुदान देने की व्यवस्था की है। खास बात यह है कि किसानों को बीज की निर्धारित कीमत का बड़ा हिस्सा अनुदान के रूप में मिलेगा। जिले के सभी विकासखंडों में किसानों की मांग के अनुरूप चना एवं मसूर के प्रमाणित बीज का पर्याप्त भंडारण होने का दावा विभाग ने किया है।
नगद बीज वितरण योजना के तहत किसानों को मसूर और चना बीज की विभिन्न किस्मों पर उनकी अवधि के अनुसार 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो सकेगा और रबी फसल की बोनी में आर्थिक मदद मिलेगी।
मसूर बीज के लिए किसानों को देने होंगे सिर्फ 27 रुपये किलो
विभागीय जानकारी के अनुसार पांच वर्ष से अधिक अवधि वाली मसूर की किस्मों पर 75 प्रतिशत अथवा अधिकतम 9 हजार रुपये प्रति क्विंटल, जो भी कम हो, अनुदान दिया जाएगा। मसूर बीज का निर्धारित विक्रय मूल्य 108 रुपये प्रति किलोग्राम है। इसमें शासन की ओर से 81 रुपये प्रति किलोग्राम अनुदान मिलेगा। इस तरह किसानों को एक किलोग्राम मसूर बीज के लिए केवल 27 रुपये खर्च करने होंगे।
चना बीज की किस्म के अनुसार मिलेगा अनुदान
चना बीज पर भी किसानों को आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है। पांच वर्ष तक की अवधि वाली चना किस्मों पर 75 प्रतिशत अथवा अधिकतम 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल, जो भी कम हो, अनुदान निर्धारित किया गया है। चना बीज का विक्रय मूल्य 88.40 रुपये प्रति किलोग्राम है। इसमें 60 रुपये प्रति किलोग्राम अनुदान मिलेगा और किसानों को केवल 28.40 रुपये प्रति किलोग्राम भुगतान करना होगा।
वहीं पांच वर्ष से अधिक अवधि वाली चना किस्मों पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल, जो भी कम हो, अनुदान दिया जाएगा। इस श्रेणी में किसानों को 40 रुपये प्रति किलोग्राम अनुदान के बाद शेष 48.40 रुपये प्रति किलोग्राम राशि जमा करनी होगी।
कृषि विभाग कार्यालय से मिलेगी जानकारी
किसान अनुदान पर प्रमाणित बीज प्राप्त करने के लिए अपने विकासखंड के कृषि विभाग कार्यालय अथवा संबंधित कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे रबी फसल की बोनी के लिए प्रमाणित बीज का उपयोग करें और शासन की अनुदान योजना का लाभ उठाएं। विभाग का कहना है कि सभी विकासखंडों में पर्याप्त बीज भंडारण किया गया है, ताकि किसानों को मांग के अनुरूप बीज उपलब्ध कराया जा सके।

