Dindori News : जर्जर भवन, एक कमरे में पाँच कक्षाएँ, अधूरा मिड-डे मील और अनुपयोगी शौचालय से मासूमों का भविष्य संकट में….

Rathore Ramshay Mardan
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मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शासन-प्रशासन लगातार सुधार की बातें करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई बयां कर देती है। ऐसा ही एक ताजा उदाहरण बजाग विकासखंड के अंतर्गत सुनपुरी प्राथमिक शाला में सामने आया। गुरुवार को एसडीएम बजाग राम बाबू देवांगन के निर्देश पर हल्का पटवारी अक्षय कटारे ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया, जहां की स्थिति ने सबको चौंका दिया।

विद्यालय में वर्तमान में केवल दो कमरे हैं, जिनमें से एक पूरी तरह से जर्जर होकर अनुपयोगी हो चुका है। सीलिंग और फर्श उखड़ चुके हैं, जिस कारण उसमें बच्चों का बैठना तो दूर, प्रवेश करना भी खतरनाक है। दूसरा कमरा ही बच्चों का सहारा है, लेकिन उसकी छत का प्लास्टर झड़ चुका है और किसी भी समय गिर सकता है। यह स्थिति बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

स्कूल में कक्षा पहली से पाँचवीं तक कुल 32 विद्यार्थी दर्ज हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। विद्यालय में सिर्फ एक नियमित शिक्षक पदस्थ हैं, जिनके भरोसे कक्षा पहली से पाँचवीं तक की पढ़ाई चल रही है। इस वजह से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना बेहद मुश्किल है और उनके भविष्य के साथ गंभीर समझौता हो रहा है।

निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन योजना को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई। बच्चों को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। कभी सब्जी नहीं मिलती तो कभी दाल की गुणवत्ता बेहद खराब होती है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को कई बार अधूरा भोजन दिया जाता है जिससे उनका पोषण प्रभावित हो रहा है और योजना पर से भरोसा उठता जा रहा है।

इतना ही नहीं विद्यालय का शौचालय पूरी तरह अनुपयोगी पाया गया। शिक्षक और छात्र खुले में शौच करने को मजबूर हैं जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों पर संकट मंडरा रहा है। यह स्थिति सरकार की स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं पर भी सवाल खड़े करती है।

गांव के अभिभावक कहते हैं कि वे अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए स्कूल भेजते हैं लेकिन जब वहां न तो सुरक्षित भवन है और न ही मूलभूत सुविधाएं, तो बच्चे पढ़ाई से विमुख हो जाते हैं। एसडीएम के निर्देशन पर हुए इस निरीक्षण ने शिक्षा व्यवस्था की असलियत उजागर कर दी है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और प्रशासन इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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