डिंडौरी। जिले के मेहंदवानी विकासखंड के ग्राम मनेरी निवासी करीब 65 वर्षीय आदिवासी किसान डुमारी सिंह ने पूर्व विधायक भूपेंद्र मरावी और उनकी पत्नी संगीता मरावी पर पैतृक कृषि भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री कराने, धोखाधड़ी करने और धमकाकर जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगाए हैं। किसान ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, एफआईआर दर्ज करने, परिवार को सुरक्षा देने और अपनी जमीन का कब्जा वापस दिलाने की मांग की है। वहीं, पूर्व विधायक ने आरोपों को खारिज करते हुए शिकायत को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है।
— ये रहा पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, डुमारी सिंह ने अपनी बीमारी के इलाज के लिए खसरा नंबर 160/1 की केवल दो एकड़ जमीन का सौदा 1.50 लाख रुपये में किया था। उनका आरोप है कि 3 मई 2019 को उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनकी अन्य कृषि भूमि की भी दो ई-रजिस्ट्रियां पूर्व विधायक की पत्नी संगीता मरावी के नाम पर करा दी गईं। शिकायतकर्ता ने खसरा नंबर 160/1, 204 और 562 की कुल करीब 10.45 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री किए जाने का दावा किया है।
दो रजिस्ट्रियों और विक्रय मूल्य पर सवाल
शिकायत में ई-रजिस्ट्री क्रमांक MP128782019A1300147 और MP128782019A1299969 का उल्लेख किया गया है। किसान के अनुसार, एक दस्तावेज में खसरा नंबर 562 की 0.20 हेक्टेयर भूमि और दूसरे में खसरा नंबर 160/1 एवं 204 की कुल 4.03 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। उन्होंने दोनों दस्तावेजों में एक ही स्थल की तस्वीर होने का दावा करते हुए पंजीयन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि खसरा नंबर 160/1 और 204 की भूमि का शासकीय मूल्यांकन 9,87,350 रुपये होने के बावजूद विक्रय मूल्य 1.50 लाख रुपये दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने इस अंतर और स्टाम्प शुल्क के निर्धारण की जांच कराने का आग्रह किया है।
नामांतरण प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
डुमारी सिंह का आरोप है कि संबंधित रजिस्ट्री के आधार पर नायब तहसीलदार मेहंदवानी के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0081/A-6/2019-20 के तहत 31 अगस्त 2019 को नामांतरण आदेश पारित किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने पूरी जमीन बेचने की सहमति नहीं दी थी। उन्होंने संबंधित दस्तावेजों की जांच कर नामांतरण आदेश की वैधानिक समीक्षा करने की मांग की है।
शिकायत में किसान ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कथित तौर पर बेची गई दो एकड़ जमीन के अतिरिक्त शेष भूमि खाली करने को कहा, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। उनका दावा है कि इसके बाद उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
पूर्व विधायक ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
मामले में पूर्व विधायक भूपेंद्र मरावी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित है। उनके अनुसार, रजिस्ट्री करीब आठ वर्ष पहले हुई थी और जमीन का पूरा भुगतान कर दिया गया था। उन्होंने शिकायतकर्ता को सीधा-साधा व्यक्ति बताते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी इस मामले में सक्रिय हैं।
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने कभी किसी को गाली नहीं दी और न ही धमकी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह डिंडौरी आकर मामले में अपना पक्ष रखेंगे तथा कानूनी पहलुओं को अधिवक्ता के माध्यम से समझेंगे।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को इलाज के लिए धन जुटाने की खातिर शेष जमीन का कुछ हिस्सा बेचने की योजना बनाते समय खसरा नकल निकलवाने पर उन्हें कथित रजिस्ट्रियों और नामांतरण की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की।
डुमारी सिंह ने कलेक्टर से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, रजिस्ट्री और राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करने तथा जांच में आरोप प्रमाणित होने पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा और कानून के अनुसार अपनी भूमि पर अधिकार एवं कब्जा वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
फिलहाल, मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों और पूर्व विधायक के जवाब के बीच वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है।
