Big Breaking : रजिस्ट्री कार्यालयों में अनियमितताओं पर बड़ा एक्शन, दो अधिकारी सस्पेंड , कलेक्टर की कार्रवाई से मचा हड़कंप……

Rathore Ramshay Mardan
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— दमोह में उप पंजीयक ज्योति पटेल और प्रभारी उप पंजीयक विमल कुमार साहू पर गिरी गाज, निरीक्षण रिपोर्ट और जांच प्रतिवेदनों के आधार पर कार्रवाई

 

मध्यप्रदेश में पंजीयन कार्यालयों की कार्यप्रणाली और रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। दमोह जिले में सामने आई कथित अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में जिला पंजीयक कार्यालय दमोह की उप पंजीयक ज्योति पटेल और जबेरा में पदस्थ प्रभारी उप पंजीयक विमल कुमार साहू शामिल हैं। दोनों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरणों में प्राप्त प्रतिवेदनों, निरीक्षण रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद कार्रवाई की गई है।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ प्रशासन, उप पंजीयक निलंबित

कलेक्टर कार्यालय से 27 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, दमोह जिला पंजीयक कार्यालय की उप पंजीयक ज्योति पटेल से निरीक्षण के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं के संबंध में जवाब मांगा गया था। उन्होंने 21 अक्टूबर को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन अधिकारियों ने उसे संतोषजनक नहीं माना। आदेश में उल्लेख किया गया कि जवाब के समर्थन में आवश्यक प्रमाण और सक्षम दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

इसके बाद 22 अक्टूबर को निरीक्षण दल के अधिकारियों से अभिमत प्राप्त किया गया। उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के बाद कलेक्टर ने ज्योति पटेल को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित करने के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय उप पंजीयक कार्यालय बटियागढ़ निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

6.43 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री में कथित गड़बड़ी, विमल कुमार साहू पर कार्रवाई

दूसरे मामले में जबेरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 एवं प्रभारी उप पंजीयक विमल कुमार साहू को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई तेंदूखेड़ा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद की गई।

प्रकरण ग्राम तांबवारा की खसरा नंबर 38 स्थित 6.43 एकड़ भूमि के विक्रय पत्र के पंजीयन से संबंधित है। कलेक्टर के आदेश के मुताबिक, भूमि के राजस्व अभिलेखों में दर्ज विवरण और विक्रय पत्र में उल्लेखित जानकारी के बीच अंतर सामने आया। इसके अलावा विक्रेता की पहचान, ई-केवाईसी सत्यापन और पंजीयन से जुड़ी अनिवार्य प्रक्रियाओं के पालन को लेकर भी सवाल उठे।

प्रशासन ने संबंधित अधिकारी के कृत्य को प्रथम दृष्टया पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में विमल कुमार साहू का मुख्यालय उप पंजीयक कार्यालय तेंदूखेड़ा निर्धारित किया गया है।

ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के बावजूद अनियमितताओं की शिकायतें

दमोह के पंजीयन कार्यालय में हुए निरीक्षण के दौरान ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के बावजूद निजी व्यक्तियों की भूमिका, रजिस्टर में प्रविष्टियों, कथित सुविधा शुल्क और रजिस्ट्री कार्य में देरी जैसी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया था। इन बिंदुओं ने पंजीयन कार्यालयों की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य में राजस्व अभिलेखों का सही मिलान, विक्रेता की पहचान का सत्यापन और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में दो अधिकारियों के निलंबन की कार्रवाई को विभागीय जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विभागीय जांच पर टिकी नजरें

दोनों अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हालांकि, फिलहाल दोनों को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है। मामले में अंतिम जिम्मेदारी का निर्धारण विभागीय जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। दमोह में हुई इस कार्रवाई ने मध्यप्रदेश के पंजीयन विभाग में जवाबदेही, पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

 

 

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