— सर्व आदिवासी समाज ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग, न्याय नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
भोपाल/ डिंडौरी । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मिसरोद थाना प्रभारी निरीक्षक रतन सिंह परिहार से जुड़े वायरल वीडियो का मामला अब प्रदेश स्तर पर चर्चा में है। आदिवासी युवकों के ‘जय जोहार’ अभिवादन के दौरान कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर सर्व आदिवासी समाज जिला डिंडौरी ने कड़ी आपत्ति जताई है। समाज ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल के नाम जिला दंडाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने, विभागीय जांच कराने और सेवा से पृथक करने की मांग की है।
दरअसल मामले में विरोध के बाद भोपाल पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस उपायुक्त, जोन-2 नगरीय पुलिस भोपाल द्वारा 14 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, वायरल वीडियो के मामले में निरीक्षक रतनलाल सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही, मामले की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कर 15 दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘जय जोहार’ केवल अभिवादन नहीं, सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
सर्व आदिवासी समाज ने अपने ज्ञापन में कहा कि ‘जय जोहार’ आदिवासी समाज की एकता, एकरूपता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। समाज के अनुसार, आदिवासी समुदाय के लोग परंपरागत रूप से एक-दूसरे के अभिवादन के लिए इस शब्द का उपयोग करते हैं। ऐसे में इस अभिवादन के प्रति कथित अभद्र भाषा का इस्तेमाल समाज की जनभावनाओं को आहत करने वाला है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी ने आदिवासी युवकों द्वारा ‘जय जोहार’ का नारा लगाए जाने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। समाज ने इस मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
दो प्रमुख मांगें, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन
राज्यपाल के नाम सौंपे गए ज्ञापन में सर्व आदिवासी समाज ने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, संबंधित पुलिस निरीक्षक के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की लागू धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। दूसरी, संबंधित अधिकारी को सेवा से पृथक करने की कार्रवाई करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित की जाए।
समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो वह उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन के माध्यम से समाज ने प्रशासन से मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने की अपील की है।
निलंबन के बाद अब जांच पर नजर
भोपाल पुलिस के निलंबन आदेश में वायरल वीडियो में प्रदर्शित आचरण को प्रथमदृष्टया पुलिस विभाग की सेवा-आचरण संबंधी अपेक्षाओं के प्रतिकूल बताया गया है। आदेश के मुताबिक, सहायक पुलिस आयुक्त, एमपी नगर को वीडियो की पेनड्राइव के आधार पर विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कर 15 दिनों के भीतर प्रतिवेदन देना है।
इस प्रकार मामले में एक ओर भोपाल पुलिस की विभागीय कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर सर्व आदिवासी समाज ने आपराधिक कार्रवाई और सेवा से पृथक करने की मांग उठाई है। अब जांच के निष्कर्ष, ज्ञापन पर प्रशासन की कार्रवाई और समाज की अगली रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
