डिंडौरी। जिले की समृद्ध आदिवासी कला और संस्कृति को नई पहचान देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक नई पहल की है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में कलेक्ट्रेट परिसर की दीवारों को गोंडी पेंटिंग से सजाने का निर्णय लिया गया है। इस पहल से पाटनगढ़ क्षेत्र के गोंडी पेंटिंग कलाकारों को पहली बार प्रशासनिक स्तर पर रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है। कलाकारों द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर की दीवारों पर पारंपरिक गोंडी शैली में चित्रांकन किया जा रहा है, जिससे कार्यालय का वातावरण कलात्मक और आकर्षक बन रहा है।
गोंडी पेंटिंग डिंडौरी जिले की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय परंपरा का प्रतीक है। यह कला जनजातीय जीवन, संस्कृति और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। पाटनगढ़ लंबे समय से अपनी पारंपरिक गोंडी कला के लिए प्रसिद्ध रहा है, जहाँ स्थानीय कलाकार पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि “यह पहल स्थानीय कला और कलाकारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम है। हमारी कोशिश है कि गोंडी पेंटिंग को व्यापक पहचान मिले और यह जिले की गौरवपूर्ण पहचान बने।”
पाटनगढ़ के कलाकारों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि कलेक्ट्रेट जैसी महत्वपूर्ण जगह पर अपनी कला प्रदर्शित करना उनके लिए गर्व की बात है। यह पहल उनके लिए नई शुरुआत और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में जिले के अन्य सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर भी स्थानीय कला को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आदिवासी कला और संस्कृति को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।





