40 लाख रुपये के आहरण को लेकर पहले सरपंच-सचिवों को सुनवाई का नोटिस, अब निर्माण की गुणवत्ता और अधूरे काम पर दो इंजीनियरों से तीन दिन में मांगा जवाब
डिंडौरी। जिले की ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की अनियमितताओं को लेकर प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। जनपद पंचायत डिंडौरी की ग्राम पंचायत गणेशपुर में पंचायत भवन निर्माण का मामला अब और गंभीर हो गया है। भवन निर्माण से जुड़े मामले में पहले सरपंच अमर सिंह पट्टा, तत्कालीन सचिव कन्हैयालाल यादव और प्रभारी सचिव भगवत यादव को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए गए थे। अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता में खामियां मिलने और निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा नहीं होने पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सहायक यंत्री बी.एस. तिलगाम और उपयंत्री धर्मेन्द्र यादव को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इस तरह गणेशपुर पंचायत भवन निर्माण का मामला अब पंचायत के पदाधिकारियों से लेकर तकनीकी निगरानी करने वाले अधिकारियों तक पहुंच गया है। प्रशासन ने दोनों इंजीनियरों से नोटिस प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
40 लाख रुपये के आहरण को लेकर पहले ही कार्रवाई के निर्देश
दरअसल, ग्राम पंचायत गणेशपुर में पंचायत भवन निर्माण से संबंधित 40 लाख रुपये की राशि के आहरण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया था। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मामले में संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रभारी सचिव भगवत प्रसाद यादव के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई करने तथा सरपंच अमर सिंह पट्टा से संबंधित राशि की वसूली और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
इसी क्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत), जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा सरपंच अमर सिंह पट्टा, तत्कालीन सचिव कन्हैयालाल यादव और प्रभारी सचिव भगवत यादव को धारा 89 के अंतर्गत पंजीकृत प्रकरण क्रमांक 437/2026 में सुनवाई के लिए सूचना पत्र जारी किए गए। मामले में 5 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे सुनवाई निर्धारित की गई है। संबंधितों को निर्धारित समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने और जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर के निरीक्षण में मिलीं निर्माण की खामियां
पंचायत भवन निर्माण के मामले में 23 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान भवन में जगह-जगह हनीकॉम्बिंग यानी कंक्रीट में छत्तेनुमा खाली स्थान पाए गए। सीढ़ियों में राइजर और चौड़ाई भी अनुपयुक्त मिली। इसके अलावा निर्माण कार्य अधूरा पाया गया।
इससे पहले 21 और 28 सितंबर 2026 को भी संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हुआ। निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी में लापरवाही सामने आने के बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सहायक यंत्री बी.एस. तिलगाम और उपयंत्री धर्मेन्द्र यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
आहरित राशि और माप पुस्तिका के मूल्यांकन में अंतर
जारी नोटिस के अनुसार, ऑनलाइन रिपोर्ट में ग्राम पंचायत द्वारा 31 लाख 64 हजार 624 रुपये की राशि आहरित किए जाने का उल्लेख है। वहीं, नोटिस में 27 लाख 89 हजार 724 रुपये के कार्य की राशि आहरित होने और माप पुस्तिका में 20 लाख 1 हजार 690 रुपये के कार्य का मूल्यांकन दर्ज होने की जानकारी दी गई है। राशि और मूल्यांकन के इन आंकड़ों के संबंध में संबंधित अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
जिला पंचायत प्रशासन ने तकनीकी मार्गदर्शन और निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही को गंभीर मानते हुए दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है। नोटिस में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
5 नवंबर को सरपंच-सचिवों की सुनवाई, इंजीनियरों के जवाब पर भी नजर
गणेशपुर पंचायत भवन निर्माण मामले में अब दो स्तरों पर कार्रवाई आगे बढ़ रही है। एक ओर सरपंच और दोनों सचिवों को 5 नवंबर को निर्धारित सुनवाई में अपना पक्ष रखना है, वहीं दूसरी ओर सहायक यंत्री और उपयंत्री को निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी तथा काम समय पर पूरा नहीं होने के संबंध में अपना स्पष्टीकरण देना होगा।
अब संबंधितों के जवाब, उपलब्ध अभिलेखों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। पंचायत भवन निर्माण का यह मामला सरकारी राशि के उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है।

