डिंडौरी। कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं डिंडौरी में वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 के दौरान विभिन्न योजनाओं एवं मदों में प्राप्त राशि और उसके विरुद्ध किए गए व्यय की जांच में कई वित्तीय एवं प्रक्रियात्मक अनियमितताएं सामने आने का उल्लेख किया गया है। जांच दल ने 9 सितंबर 2026 को विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के आधार पर डॉ. अभिनव शुक्ला, डॉ. एचपी शुक्ला, डॉ. अनूकूल पाठक और डॉ. मकबूल मंसूरी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार जिला पशु कल्याण समिति के बैंक खाते से राशि आहरण के लिए सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं पाए गए। चेक पंजी के संधारण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होने, एफएमडी/एनएडीसीपी टीकाकरण राशि के भुगतान संबंधी अभिलेखों में कमी तथा भुगतान सूची और बैंक लेनदेन में विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया है।
इसी तरह मोबाइल वेटरनरी यूनिट (एमवीयू) की राशि के व्यय में पृथक बैंक खाते और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने, कर्मचारियों को निर्धारित सीमा से अधिक नगद राशि दिए जाने तथा पंजीयन शुल्क के उपयोग से संबंधित आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई है।
कैशबुक में भी मिली विसंगतियां
जांच में कैशबुक के संधारण को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बैंक शेष और कैशबुक में दर्ज राशि में अंतर पाया गया। इसके अलावा बैंक द्वारा विभिन्न चेकों से काटी गई राशि की प्रविष्टियां कैशबुक में दर्ज नहीं होने का भी उल्लेख किया गया है।
मार्च 2026 के भुगतानों पर भी उठे सवाल
जांच प्रतिवेदन में मार्च 2026 के दौरान विभिन्न वेंडरों को समान राशि के दो से तीन देयकों के भुगतान का उल्लेख करते हुए प्रथम दृष्टया दोहरे भुगतान की संभावना बताई गई है। वहीं एमवीयू से संबंधित देयकों में कार्य के सत्यापन एवं प्रमाणीकरण का अभाव भी जांच में दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 27 मई 2025 से 18 मार्च 2026 के बीच आकाश टायर्स से 15 बार टायर खरीदे गए, लेकिन इन खरीदी की आवश्यकता और प्रक्रिया का स्पष्ट अभिलेखीय आधार जांच दल के समक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया।
सात दिन में मांगा स्पष्टीकरण
जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों का म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन के संबंध में प्रथम दृष्टया उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। संबंधित अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के सात दिवस के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। अभी यह मामला जांच प्रतिवेदन और कारण बताओ नोटिस के स्तर पर है तथा संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
