डिंडौरी। नगर परिषद डिंडौरी की कार्यप्रणाली और नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सेवाओं को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं और तकनीकी प्रकृति के कार्यों के संचालन में निर्धारित योग्यता, तकनीकी दक्षता और जिम्मेदारी के मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है। मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
नगर परिषद की जिम्मेदारी पेयजल एवं जलशोधन, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन, नाली एवं जल निकासी, सड़क एवं सार्वजनिक मार्गों का रखरखाव, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय, अग्निशमन सहित कई आवश्यक नागरिक सेवाओं से जुड़ी है। ऐसे में इन सेवाओं में तकनीकी दक्षता और प्रभावी निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
— भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारियों की योग्यता पर सवाल
मामले में मांग की गई है कि नगर परिषद में नियमित अथवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों की शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता, अनुभव, चयन प्रक्रिया और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि कर्मचारियों को उनकी योग्यता और पद के अनुरूप ही जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं या नहीं।
जांच के दौरान आवेदन पत्र, प्रमाण-पत्र, चयन समिति की कार्यवाही, नियुक्ति आदेश और तैनाती संबंधी रिकॉर्ड की जांच से भर्ती प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
— बिल भुगतान के बाद जमीन पर काम की स्थिति भी जांच के दायरे में
नगर परिषद द्वारा विभिन्न सेवाओं और कार्यों पर किए जा रहे खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मांग है कि जिन कार्यों के लिए भुगतान किया गया है, उनका मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए।
स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, नाली एवं जल निकासी अथवा अन्य नागरिक सेवाओं पर राशि खर्च होने के बावजूद यदि समस्याएं बनी हुई हैं, तो दस्तावेजों में दर्ज कार्य और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि के अनुरूप कार्य वास्तव में हुआ है या नहीं और उसकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
— जनता के पैसे के उपयोग में पारदर्शिता की मांग
मामले में यह भी कहा गया है कि नगर परिषद द्वारा नागरिकों के पैसे से संचालित सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
— मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग
इस संबंध में अधिवक्ता सम्यक जैन द्वारा मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को प्रतिनिधित्व भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग किए जाने की जानकारी दी गई है। इसमें कर्मचारियों की नियुक्ति एवं योग्यता, मूल अभिलेख, कार्यादेश, बिल एवं भुगतान, कार्यों का भौतिक सत्यापन, तकनीकी गुणवत्ता तथा संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही की जांच की मांग शामिल है।
अब निगाहें शासन-प्रशासन की संभावित जांच पर टिकी हैं। जांच होने पर कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान के अनुरूप जमीनी स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविकता सामने आ सकेगी। यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी तय करने के साथ कार्रवाई और सुधार की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।
