डिंडौरी। जिला अस्पताल डिंडौरी में मरीज के उपचार के दौरान स्थापित चिकित्सकीय मानकों की अनदेखी और गंभीर लापरवाही के मामले में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। 22 जुलाई को जिला अस्पताल में भर्ती एक मरीज के उपचार के दौरान सामान्य सलाइन वाटर के स्थान पर पैक्ड पेयजल (मिनरल वॉटर) की बोतल का उपयोग किए जाने के मामले की प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद नर्सिंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), सिविल सर्जन-सह-अस्पताल अधीक्षक और मेडिकल ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
जारी आदेशों के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को 18 वर्षीय सत्यम यादव, निवासी वार्ड क्रमांक-5 डिंडौरी, को चूहा मार दवा के सेवन के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान सामान्य सलाइन वाटर के स्थान पर पैक्ड पेयजल की बोतल का उपयोग किए जाने का मामला सामने आने पर कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल प्रारंभिक जांच कराई गई।
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि उपचार के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। साथ ही अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का समुचित प्रबंधन, आवश्यक उपचार सामग्री का संधारण, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा अधीनस्थ चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ के प्रभावी पर्यवेक्षण और नियंत्रण में गंभीर कमी पाई गई। जांच में यह भी पाया गया कि अस्पताल में सामान्य सलाइन उपलब्ध होने के बावजूद बिना किसी वरिष्ठ चिकित्सक की सलाह के पैक्ड मिनरल वाटर की बोतल का उपयोग किया गया, जो स्थापित चिकित्सकीय मानकों का गंभीर उल्लंघन है और इससे मरीज के जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता था।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अस्पताल में आवश्यक औषधियों एवं चिकित्सकीय सामग्री की उपलब्धता, उपचार प्रोटोकॉल का पालन तथा अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों का प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों का दायित्व है। इन दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के कारण न केवल स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल हुई, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हुए हैं।
— नर्सिंग ऑफिसर तत्काल प्रभाव से निलंबित
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नर्सिंग ऑफिसर सुश्री भावना चौहान को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, डिंडौरी निर्धारित किया गया है तथा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगाई गई है। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।
— CMHO समेत तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय, सिविल सर्जन-सह-अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमेशा मरावी तथा मेडिकल ऑफिसर डॉ. भरत कुमार संत को अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में कहा गया है कि अस्पताल में उपचार संबंधी मानकों का पालन, आवश्यक चिकित्सकीय सामग्री की उपलब्धता, अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों का प्रभावी पर्यवेक्षण तथा प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करने में गंभीर शिथिलता और लापरवाही बरती गई है, जो मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है।
सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 3 अगस्त 2026 तक अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। यदि निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है अथवा उत्तर संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने आदेश की प्रतिलिपि आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल, कमिश्नर जबलपुर संभाग, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर, कोषालय अधिकारी डिंडौरी और संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की है। इस कार्रवाई को जिला अस्पताल में सामने आई गंभीर लापरवाही पर प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।



