Monsoon 2026 : मानसून में देरी की आशंका, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जारी की एडवाइजरी….

Rathore Ramshay Mardan
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कम बारिश की स्थिति से निपटने की तैयारी करें किसान, केवीके ने दी वैज्ञानिक सलाह

 

डिंडौरी। जिले में मानसून के निर्धारित समय से देरी से पहुंचने की संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) डिंडौरी ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों ने किसानों से मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खेती की तैयारी पहले से करने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की अपील की है, ताकि फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बुवाई के लिए उत्तम गुणवत्ता के बीज एवं आवश्यक कृषि आदान सामग्री समय रहते उपलब्ध रखने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार कम से कम 100 मिलीमीटर (तीन से चार इंच) वर्षा होने के बाद ही बुवाई शुरू की जानी चाहिए। साथ ही बीजों को रोगों से बचाने के लिए फफूंदनाशक दवाओं से उपचारित करना आवश्यक है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज अथवा कार्बॉक्सिन 37.5 प्रतिशत एवं थायरम 37.5 प्रतिशत डब्ल्यू.एस. 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने पर बीज जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है। किसानों को फसलों की बुवाई कतारों में करने तथा बुवाई के समय बीज के साथ रासायनिक उर्वरकों को न मिलाने की सलाह भी दी गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार यदि मानसून 30 जून 2026 तक जिले में पहुंच जाता है तो किसान धान की जेआर-206, जेआर-81 और एमटीयू-1010, सोयाबीन की जेएस-95-60, जेएस-97-52 एवं एनआरसी-37, मक्का की जेएम-421 और जेएम-218 तथा कोदो की जेके-439 एवं जेके-48 किस्मों की बुवाई कर सकते हैं।

वहीं यदि मानसून में अधिक देरी होती है और बुवाई की स्थिति 15 जुलाई 2026 के बाद बनती है तो किसानों को धान की आईआर-64, जेआर-201 और दंतेश्वरी, कोदो की जेके-439, जेके-41 एवं जेके-137, मक्का की जेएम-218 और जेएम-12 तथा कुटकी की डिंडौरी-1, जीके-8, सीओ-2 और पीआरसी-3 प्रजातियों की बुवाई करने की सलाह दी गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र डिंडौरी ने किसानों से मौसम आधारित खेती अपनाने तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप कृषि कार्य करने का आग्रह किया है, ताकि कम वर्षा या मानसून में देरी की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

 

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