डिंडौरी। जिले में निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति और विभागीय लापरवाही पर कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। बिजौरा जलाशय निर्माण कार्य में अत्यंत धीमी प्रगति और शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एस.के. शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जारी नोटिस के अनुसार बिजौरा जलाशय निर्माण कार्य वर्ष 2022-23 में स्वीकृत हुआ था, जिसकी मूल एवं समयावृद्धि अवधि 20 अक्टूबर 2025 तक निर्धारित थी। परियोजना की कुल स्वीकृत राशि 1111.07 लाख रुपये है, लेकिन अब तक केवल 281.25 लाख रुपये का ही कार्य पूर्ण हो सका है। कार्य की बेहद धीमी गति को देखते हुए विभाग को 21 अक्टूबर 2025 से 31 दिसंबर 2026 तक द्वितीय समयावृद्धि भी प्रदान की गई थी।
कलेक्टर द्वारा 23 अप्रैल 2026 को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में निर्माण कार्य की प्रगति अत्यंत असंतोषजनक पाई गई। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि विभाग की ओर से अब तक पुनरीक्षित कार्य योजना और माइलस्टोन तक प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्धारित समय सीमा में परियोजना के पूर्ण होने की संभावना भी कम जताई गई है।
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन, विभागीय निर्देशों की अवहेलना तथा परियोजना के प्रति गंभीर लापरवाही बरती गई है। इसके कारण कमांड क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है।
कलेक्टर ने इस मामले को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की है। साथ ही कार्यपालन यंत्री को 7 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं देने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।




