Politics News : MP कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, ओमकार मरकाम और भूपेंद्र मरावी को बड़ी जिम्मेदारी, ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल की नई सूची जारी…

Rathore Ramshay Mardan
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स्टेट ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल गठित, कई वरिष्ठ विधायक और नेता बनाए गए सदस्य

भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में कांग्रेस संगठन ने आदिवासी नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “स्टेट ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल” का गठन किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के आदिवासी कांग्रेस विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में प्रदेश के कई वरिष्ठ आदिवासी नेताओं, विधायकों और पूर्व मंत्रियों को परिषद का सदस्य बनाया गया है।

 

ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के चेयरमैन डॉ. विक्रांत भूरिया द्वारा 8 मई 2026 को जारी नोटिफिकेशन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी गई। आदेश के अनुसार नियुक्त नेताओं को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी में स्टेट ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य तथा आदिवासी कांग्रेस का विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया गया है।

 

कांग्रेस द्वारा गठित इस परिषद में पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, कांग्रेस विधायक दल के नेता उमंग सिंघार, विधायक ओमकार सिंह मरकाम, बाला बच्चन, प्रताप सिंह उइके, सुरेंद्र सिंह हनी बघेल, फुंदेलाल सिंह मार्को, नारायण सिंह पट्टा, योगेंद्र सिंह बाबा, संजय उइके, सुनील उइके, निलेश पुषाराम उइके, अभिजीत शाह (अंकित बाबा), झूमा सोलंकी, केदार चिदाभाई डिवार, मोंटू सोलंकी, राजन मंडलोई और डॉ. हीरालाल अलावा सहित कुल 22 नेताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा एआईसीसी सचिव भूपेंद्र मरावी और स्वयं डॉ. विक्रांत भूरिया को भी परिषद में सदस्य बनाया गया है।

 

आदिवासी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने की तैयारी

 

राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस आगामी चुनावों और आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से संगठनात्मक स्तर पर यह रणनीतिक बदलाव कर रही है। मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी वर्ग का प्रभाव कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम आदिवासी समाज के बीच राजनीतिक संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेश में झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में कांग्रेस इस परिषद के माध्यम से संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने की तैयारी में है।

 

इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी

कांतिलाल भूरिया (पूर्व केंद्रीय मंत्री)

उमंग सिंघार (सीएलपी लीडर)

ओमकार सिंह मरकाम (विधायक)

बाला बच्चन (विधायक)

प्रताप सिंह उइके (पूर्व मंत्री)

सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (विधायक)

भूपेंद्र मरावी (सचिव, एआईसीसी)

डॉ. विक्रांत भूरिया (चेयरमैन, एआईएसी)

फुंदेलाल सिंह मार्को (विधायक)

नारायण सिंह पट्टा (विधायक)

योगेंद्र सिंह बाबा (विधायक)

संजय उइके (विधायक)

सुनील उइके (विधायक एवं राष्ट्रीय समन्वयक)

निलेश पुषाराम उइके (विधायक)

अभिजीत शाह ‘अंकित बाबा’ (विधायक)

झूमा सोलंकी (विधायक)

केदार डिवार (विधायक)

मोंटू सोलंकी (विधायक)

राजन मंडलोई (विधायक)

डॉ. हीरालाल अलावा (विधायक)

कांग्रेस के इस फैसले को प्रदेश में आदिवासी राजनीति को नई दिशा देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

 

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