भोपाल। पंचायत राज संचालनालय, मध्यप्रदेश ने नर्मदा परिक्रमा पर निकलने वाले परिक्रमावासियों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी ग्राम पंचायतों को प्रमाण-पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। नर्मदा परिक्रमा प्रदेश और देश के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, परंतु अब तक परिक्रमावासियों के पास उनकी पहचान सिद्ध करने के लिए कोई अधिकृत दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता था। कई बार उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों, पंचायत सीमाओं या प्रशासनिक जाँच के दौरान अपनी पहचान सिद्ध करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। शासन को मिली इन सूचनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि प्रमाणिक दस्तावेज के अभाव में परिक्रमावासी असहज परिस्थितियों में फंस जाते हैं और कई स्थानों पर प्रवेश में भी बाधा का सामना करते हैं।
इन्हीं समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से संचालनालय ने परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया लागू की है। परिक्रमावासी अब ग्राम पंचायत में आवेदन देकर प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे। आवेदन के लिए दो पासपोर्ट साइज फोटो और एक मान्य पहचान पत्र अनिवार्य होंगे। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि आवेदन मिलने पर तत्काल निर्धारित प्रारूप के अनुसार प्रमाण-पत्र जारी किया जाए, जिससे परिक्रमावासी नर्मदा तट से लगे किसी भी ग्राम में सरलता से प्रवेश कर सकें और आवश्यक होने पर स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन के समक्ष अपनी पहचान प्रमाणित कर सकें। पंचायतों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे प्रमाण-पत्र जारी करने का रजिस्टर संधारित करें, ताकि जारी किए गए दस्तावेजों का संपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
शासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रमाण-पत्र नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं को सुरक्षा, सुविधा और सम्मानजनक सहयोग प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण साधन बनेगा। वर्षों से परिक्रमा करने वाले कई लोगों को गाँव-गाँव में जानकारी न होने या दस्तावेज न होने के कारण असुविधाओं का सामना करना पड़ा है, जिसे दूर करने में यह नई व्यवस्था सहायक सिद्ध होगी। स्थानीय पुलिस बल को भी इस प्रमाण-पत्र को परिक्रमावासी की वैध पहचान के रूप में मान्यता देने के निर्देश दिए गए हैं।
परिपत्र में सभी जिलों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे अब तक अपने स्तर से पंचायतों द्वारा जारी किए गए प्रमाण-पत्रों की संख्यात्मक जानकारी एकत्र कर निर्धारित प्रपत्र के अनुसार संचालनालय को 15 दिवस के भीतर भेजें। इस व्यवस्था की समीक्षा शासन स्तर पर की जाएगी, ताकि पूरे प्रदेश में इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।




