मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर शिक्षा मंत्रालय के एक RTI जवाब ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है। शासकीय शिक्षक संगठन, जिला डिंडौरी के अध्यक्ष राम कुमार गर्ग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्रथम अपील पर 21 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट किया है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET लागू होने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में विभाग की ओर से प्रस्तुत किसी टिप्पणी, कानूनी राय, पत्र, शपथ-पत्र या लिखित तर्क का रिकॉर्ड मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है।
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह मामला बल बियर सिंह द्वारा दायर RTI आवेदनों और उनसे संबंधित प्रथम अपील से जुड़ा है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी प्राची पाण्डेय द्वारा पारित आदेश में TET से संबंधित अभिलेखों और नियमों की जानकारी दी गई है।
NCTE की अधिसूचनाओं को बताया TET का वैधानिक आधार
संगठन के अनुसार, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने 22 सितंबर 2026 को दिए जवाब में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना, 29 जुलाई 2011 के संशोधन और 11 फरवरी 2011 की TET गाइडलाइंस की प्रतियां उपलब्ध कराईं। मंत्रालय ने इन्हीं प्रावधानों के पैरा-4 को TET का वैधानिक आधार बताया है।
नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की भूमिका
मंत्रालय के जवाब के अनुसार, शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति और सेवा समाप्ति जैसे मामले संबंधित राज्य सरकारों अथवा केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में पदोन्नति से संबंधित जानकारी के लिए संबंधित राज्य सरकार से संपर्क करना होगा।
पुराने नियुक्त शिक्षकों को छूट के संबंध में नहीं मिला रिकॉर्ड
प्रेस विज्ञप्ति में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में मंत्रालय के उस जवाब का उल्लेख किया गया है, जिसमें 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET लागू होने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में विभागीय टिप्पणी, कानूनी राय, पत्र, शपथ-पत्र या लिखित तर्क प्रस्तुत किए जाने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
इसके अतिरिक्त, RTI जवाब के अनुसार, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 23(2) के तहत छूट अथवा विशेष प्रावधान से संबंधित कोई अभिलेख मंत्रालय के SS-3 अनुभाग में उपलब्ध नहीं बताया गया है।
हालांकि, मंत्रालय के पास रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात को अपने आप में पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट मिलने का अंतिम कानूनी निर्णय नहीं माना जा सकता। इस संबंध में लागू अधिसूचनाओं, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और संबंधित राज्य के नियमों का अध्ययन आवश्यक होगा।
राज्यों से मांगी गई प्रभावित शिक्षकों की जानकारी
संगठन की ओर से जारी विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि शिक्षा मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2025 को D.O. पत्र संख्या 3-3/2024-IS.20 जारी कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रभावित शिक्षकों की संख्या की जानकारी मांगी थी। विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्रालय ने इसके अतिरिक्त कोई अन्य सर्कुलर जारी नहीं किया है।
शासकीय शिक्षक संगठन, जिला डिंडौरी के अध्यक्ष राम कुमार गर्ग ने इस RTI जवाब को TET से जुड़े नियमों और पुराने नियुक्त शिक्षकों की स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है। इस मामले में शिक्षकों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित न्यायिक निर्णयों और राज्य सरकार के निर्देशों का परीक्षण अहम रहेगा।
