डिंडौरी। देव उठनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को शहपुरा नगर में पारंपरिक दो दिवसीय ऐतिहासिक मड़ई का शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। सुबह देवी चंडी के ब्याह की पारंपरिक विधि पूरी की गई और नगर में देवी चंडी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल नगाड़ों शंखध्वनि और जयघोषों के बीच पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस परंपरा को विशेष बना दिया। मड़ई स्थल पर दूर-दराज़ के गांवों से आए व्यापारियों ने अपने-अपने स्टॉल सजाए जिससे पूरा मैदान रंगीन और जीवंत नजर आया। गन्ना मूंगफली सिंघाड़ा कपड़े खिलौने और घरेलू वस्तुओं की दुकानों पर खरीददारी के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं बच्चों और युवाओं के लिए लगे झूले चरखी और खेल स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सांस्कृतिक मंच पर लोक कलाकारों ने क्षेत्रीय परंपराओं को जीवंत कर दिया। करमा सैला गोंडी और अहीर नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खास तौर पर अहीर नृत्य ने सभी का ध्यान खींचा। नर्तकों की एकरूपता पारंपरिक पोशाक और मंजीरे की ताल पर थिरकते कदमों ने तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी।
इसी बीच शाम को मेले में लगे एक बड़े झूले में अचानक तकनीकी खराबी आने से कुछ समय के लिए अफरातफरी मच गई। झूला बीच में रुक जाने से लोगों में दहशत फैल गई लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और सभी लोगों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। किसी के घायल न होने से लोगों ने राहत की सांस ली।
मड़ई के धार्मिक माहौल में खाटू वाले बाबा श्याम का जन्मोत्सव भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। पुरानी टॉकीज़ के पास भक्तों ने बाबा श्याम की भव्य झांकी सजाई। भजन संध्या और कीर्तन कार्यक्रमों में भक्तों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। “जय श्री श्याम” के जयघोषों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और प्रसाद वितरण के साथ भक्तों ने सुख समृद्धि की कामना की। रविवार को देवी चंडी की विशेष आरती प्रसाद वितरण और पारंपरिक झांकी यात्रा के साथ दो दिवसीय मड़ई का समापन होगा। इस वर्ष की मड़ई ने जहां धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का संगम प्रस्तुत किया वहीं सामाजिक एकता और सामुदायिक सहभागिता की मिसाल भी कायम की।





