मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिला मुख्यालय सहित विकासखंड समनापुर की सड़कों पर इन दिनों मासूम बच्चों का भीख मांगना आम नजारा बन गया है। किताब और खेल की उम्र में ये बच्चे राहगीरों से दया की भीख मांगते नजर आते हैं। जिम्मेदार विभागों की अनदेखी ने भिक्षावृत्ति को यहाँ संगठित रूप दे दिया है। बाजार, होटल और मंदिर प्रांगणों के आसपास महिलाओं और बच्चों की टोलियाँ दिनभर राहगीरों को घेरती रहती हैं। कई बार इनकार करने पर अभद्रता तक की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे श्रद्धालु, दुकानदार और आम नागरिक परेशान हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार समनापुर और अमरपुर क्षेत्र से जुड़े ये परिवार प्रधानमंत्री आवास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, इसके बावजूद भीख को ही रोजगार बनाए हुए हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से कुछ परिवारों के पास दोपहिया वाहन तक होने की जानकारी मिली है।
स्थानीय दुकानदार सुनील साहू का कहना है कि सुबह से शाम तक दुकान के सामने टोलियाँ लगी रहती हैं जिससे ग्राहक असहज हो जाते हैं। मां कल्याणी मंदिर पहुंचे श्रद्धालु मदनमोहन राय ने कहा कि भिक्षावृत्ति अब इतनी संगठित हो चुकी है कि लगता है यह सब किसी गिरोह के इशारे पर हो रहा हो। उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।
मध्यप्रदेश भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 के तहत भीख मांगना अपराध है। इस कानून में भिखारियों के पुनर्वास और प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सके। लेकिन जिले में न तो कानून का पालन हो रहा है और न ही पुलिस सख्ती बरत रही है। यहां तक कि भिखारियों की संख्या का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड भी मौजूद नहीं है।
स्थिति बच्चों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकार ने 4 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया है। झुग्गी-झोपड़ियों तक मध्यान्ह भोजन, स्कूल और किताब-कॉपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से दूर होकर भीख मांगने को मजबूर हैं। यह हालात योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक भिखारियों की संख्या में मध्यप्रदेश देश में पांचवें स्थान पर है। यह तब है जब गरीबों के लिए मुफ्त भोजन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस संबंध में जनपद पंचायत सीईओ जतिन कुमार ठाकुर ने कहा कि भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। ग्राम पंचायत और पुलिस मिलकर कार्रवाई करेगी और भिखारियों की सूची तैयार कर उन्हें पुनर्वास योजना से जोड़ा जाएगा।




