भोपाल। लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश ने अतिथि शिक्षक को नियमित करने की मांग को नियमानुसार अमान्य मानते हुए निरस्त कर दिया है। यह निर्णय माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश के अनुपालन में प्रस्तुत अभ्यावेदन पर विचार के बाद लिया गया।
जारी आदेश के अनुसार, शहडोल जिले के ग्राम सतखुरी निवासी अजय कुमार जयसवाल ने WP 15115/2024 के तहत उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर स्वयं को नियमित शिक्षक घोषित किए जाने की मांग की थी। न्यायालय ने 5 जुलाई 2024 को पारित आदेश में याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करे, जिस पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए।
इस आदेश के पालन में याचिकाकर्ता द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय को अभ्यावेदन दिया गया। अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2010-11 में शासकीय नवीन प्राथमिक शाला करकचहा (डाइस कोड-23180215203) की स्थापना के बाद नियमित शिक्षक के अभाव में याचिकाकर्ता ने अतिथि शिक्षक के रूप में अध्यापन, सर्वेक्षण, परीक्षा मूल्यांकन एवं शाला संबंधी अन्य दायित्व गुरुजी की तरह निभाए, इसलिए उन्हें नियमित किया जाए।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा प्रचलित भर्ती नियमों की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया गया कि अतिथि शिक्षकों को सीधे पात्रता परीक्षा के आधार पर नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। मध्यप्रदेश राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) भर्ती नियम 2018 एवं संशोधित नियम 01 दिसंबर 2022 के अनुसार, शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षक पात्रता परीक्षा एवं चयन परीक्षा के माध्यम से मेरिट के आधार पर ही की जा सकती है।
नियमों के तहत अतिथि शिक्षकों के लिए केवल यह प्रावधान है कि सीधी भर्ती के विज्ञापित पदों में से 50 प्रतिशत पद ऐसे अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित होंगे, जिन्होंने न्यूनतम तीन शैक्षणिक सत्रों में 200 दिवस का कार्य किया हो, किंतु नियुक्ति चयन परीक्षा में मेरिट के आधार पर ही होगी। इन तथ्यों के आधार पर संचालनालय ने याचिकाकर्ता की नियमितीकरण संबंधी मांग को नियमानुसार असंगत बताते हुए अभ्यावेदन निरस्त कर दिया। इस संबंध में आदेश 20 फरवरी 2026 को जारी किया गया।

