डिंडौरी। कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कृषि विभाग, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र, पशु चिकित्सा विभाग, उद्यानिकी, मत्स्य, जल संसाधन, सहकारिता, उद्योग, सामाजिक न्याय, नाबार्ड, बैंकर्स, प्रगतिशील किसान, नरवाई प्रबंधन, कृषि अभियांत्रिकी, आत्मा गर्वनिंग बोर्ड, प्राकृतिक खेती, परंपरागत कृषि विकास योजना और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधिकरण, टिकाऊ खेती, सिंचाई विस्तार, जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, कृषिगत ऋण की सुगमता और सुशासन आधारित सेवाओं को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की गई। इसके अलावा आगामी छह वर्षों के लिए धन-धान्य कृषि योजना के प्रस्ताव तैयार करने पर भी विचार विमर्श हुआ।
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने बैठक में कृषि विकास की दिशा में उन्नत बीज वितरण, आधुनिक कृषि यंत्र, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। सिंचाई सुविधा के लिए चैकडेम, एनिकट, मेढ़बंदी और ड्रिप-स्प्रिंकलर तकनीक के विस्तार को प्राथमिकता दी गई। साथ ही मुडकी, खरमेर और डिंडौरी सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।
जिले के सभी विकासखंडों में श्रीअन्न बीज बैंक, वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज निर्माण को गति देने पर सहमति बनी। जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए क्रमशः 2000 हेक्टेयर और 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य निर्धारित किया गया। महिलाओं को कृषि विकास में शामिल करने के लिए डिंडौरी में दो शहद उत्पादन इकाइयां और करंजिया, बजाग तथा मेहदवानी में मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसके अलावा बांस, सूरजमुखी, कुसुम और दलहन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए मार्केट लिंकेज को मजबूत करने की पहल भी की गई।
बैठक में कलेक्टर ने क्लस्टर मॉडल पर कार्य करने का जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक-दूसरे के कार्यों की जानकारी रहे और किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके। इसमें शहद, मशरूम, मत्स्य पालन, जैविक खेती, मुर्गी पालन, दुग्ध डेयरी, स्थानीय उत्पाद श्रीअन्न, वनोपज, राई तेल, ब्रांडिंग और विपणन जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही जिले के पात्र किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड शीघ्र बनवाने के निर्देश भी दिए गए।
कलेक्टर ने सुपरशीडर कृषि यंत्र पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर क्षेत्र में कम से कम 10 किसानों को इसके बारे में जानकारी दी जाए और शासन द्वारा प्रदान किए जा रहे 1 लाख 20 हजार रुपये के अनुदान का लाभ दिलाया जाए। कलेक्टर ने आत्मा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को राज्य या राज्य से बाहर उत्तम कृषि तकनीक और प्रशिक्षण दिलाया जाए, ताकि उनकी उत्पादन क्षमता और आय बढ़ सके।
विशेष फोकस बैठक का था बजाग क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की लापरवाही। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई कर्मचारी अपने क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं करता है या कार्य में लापरवाही करता है, तो उसका वेतन कोषालय अधिकारी द्वारा रोक दिया जाएगा। केवल कार्य पूर्ण होने पर ही वेतन जारी किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी थे: सीईओ जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. पी.एल. अंबुलकर, डॉ. अवधेश पटेल, कृषि उपसंचालक अभिलाषा चौरसिया, आत्मा प्रभारी नेहा धूरिया, महाप्रबंधक उद्योग राधिका कुशरो, एनआरएलएम प्रबंधक अर्पणा पांडे, विटनरी अधिकारी एच.पी. शुक्ला, मत्स्य अधिकारी राकेश चंदेल, कार्यपालन यंत्री विद्युत विभाग राकेश बघेल, जल संसाधन विभाग के ए.के. शर्मा, सहकारिता अधिकारी अशोक द्विवेदी, उद्यानिकी अधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारी।
कलेक्टर की इस समीक्षा बैठक से जिले में कृषि विकास, किसान सशक्तिकरण और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट संदेश गया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और किसानों के हित में हर कदम सक्रिय रूप से उठाया जाएगा।




