मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड का स्वास्थ्य केंद्र कागजों पर भले ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा हो, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मरीजों को इलाज के बजाय यहां ताला और इंतजार ही नसीब हो रहा है। सुबह 10 बजे तक अक्सर केंद्र पर ताला लटका रहता है, जिससे उपचार के लिए आने वाले मरीज मायूस होकर लौट जाते हैं।
स्वास्थ्य केंद्र में न तो नियमित डॉक्टर की तैनाती है और न ही पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता। जांच उपकरण महीनों से खराब पड़े हैं, जिन्हें ठीक कराने की किसी को फिक्र नहीं है। स्टाफ की कमी का यह आलम है कि सामान्य बीमारियों के मरीजों को भी समनापुर से सीधे डिंडौरी जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
ग्रामीण संजय कुमार ने बताया कि “सुबह किसी आपात स्थिति में मरीज को लेकर आते हैं तो यहां ताला लटका मिलता है। मजबूरी में निजी वाहन से डिंडौरी ले जाना पड़ता है। गरीब आदमी इतना खर्च कैसे उठाए।” वहीं सुमित्रा बाई ने कहा कि “यहां न डॉक्टर मिलते हैं और न दवाइयाँ। हमें महंगी दवाइयाँ बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। सरकार ने अस्पताल तो बनवा दिया, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।”
ग्रामीणों ने मांग की है कि केंद्र में तत्काल डॉक्टरों की तैनाती की जाए, दवाइयों की सप्लाई सुनिश्चित की जाए और जांच उपकरणों को दुरुस्त कराया जाए, ताकि मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि वर्षों से बनी हुई है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी केवल आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लोगों का कहना है कि जब जनपद मुख्यालय का स्वास्थ्य केंद्र ही भगवान भरोसे है तो दूरस्थ गांवों के हालात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
इनका कहना है
“स्वास्थ्य कर्मी सुबह 9 बजे तक आ जाते हैं। यदि कभी समय पर नहीं पहुंचते हैं तो मैं इस विषय में दिखवाता हूं।”
— प्रेमसिंह कुशराम, बीएमओ समनापुर।




