मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में इन दिनों शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए सरपंच–सचिव और ठेकेदार के द्वारा मिलीभगत कर नियम विरुद्ध लाखों उड़ाए जा रहे है। ताजा मामला जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत माझियाखार का सामने आया है। ग्रामीण विकास की रीढ़ कही जाने वाली पंचायतें आज भ्रष्टाचार का अड्डा बनती जा रही हैं। शासन की योजनाओं का लाभ जहां गांव तक पहुंचना चाहिए, वहां जिम्मेदारों की मिलीभगत से जनता ठगी जा रही है।
मामला सोलर लाईट खरीदी का है। मध्यप्रदेश शासन ने 07 अक्टूबर 2024 को सोलर लाईट, सोलर ट्री, सोलर स्टड और सोलर हाई मास्ट की खरीदी एवं स्थापना पर प्रतिबंध लगाया था। कारण था कि ये उपकरण जल्दी खराब हो जाते हैं और जनता का धन व्यर्थ चला जाता है। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों ने आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए वंश सोलर एनर्जी को 28 जून 2025 को 7,89,000 रुपये का भुगतान कर दिया। सूत्र बताते हैं कि गांव में एलईडी खरीदी के नाम पर मात्र 30 नग प्रतिबंधित सोलर लाईटें ही लगाई गई हैं। यानी शासन को गुमराह कर सरपंच, सचिव और ठेकेदार ने मिलकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये हड़प लिए।

यह पहला मामला नहीं है। पंचायत में पहले भी भाजपा जिलाध्यक्ष के आगमन के नाम पर वाहन व्यय में हजारों रुपये खर्च करने का मामला चर्चा में आ चुका है। अब सोलर लाईट घोटाले ने पंचायत की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15वें और 5वें वित्त की राशि का आहरण भी बिना कार्य कराए अन्य व्ययों में किया गया है। उच्च अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही से गांवों का विकास सिर्फ कागजों तक सिमट गया है। वहीं जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं।
