Panchayat Corruption: विकास की आड़ में फिजूलखर्ची ! ग्राम पंचायत फंड से विकास यात्राओं के पर 2 .15 लाख खर्च…

Rathore Ramshay Mardan
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इन दिनों मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में ग्राम पंचायत फंड का खुलेआम लूट का खेल जारी है। पंचायत फंड का उद्देश्य ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन है। इसके लिए सरकार द्वारा पंचायतों को पांचवीं और 15 वें वित्त आयोग के तहत भारी-भरकम राशि उपलब्ध कराई जाती है। यह राशि गाँवों के सड़क, पानी, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों पर खर्च होने के लिए होती है। लेकिन डिंडौरी जिले के कई ग्राम पंचायतों सरपंच, सचिव के द्वारा नियम निर्देशों को ठेंगा दिखाते मनमाना भुगतान किया जा रहा है।

ताज़ा मामला: जनपद पंचायत समनापुर की ग्राम पंचायत कुकर्रामठ में पंचायत फंड की खुलेआम लूटखसोट उजागर हुआ है। पंचायतों को पांचवें और 15वें वित्त आयोग के तहत सरकार द्वारा करोड़ों की राशि सड़क, पानी, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दी जाती है। लेकिन कुकर्रामठ पंचायत के सरपंच और सचिव ने नियमों को दरकिनार कर इस राशि का मनमाने तरीके से खर्च किया।

बता दें कि कि वर्ष 2024-25 में आकस्मिक बिल वाउचर के जरिए विकास यात्रा और विभिन्न आयोजनों के नाम पर लाखों का भुगतान किया गया। विकसित भारत यात्रा में टेंट के नाम पर – 50,000 रुपये,विकास संकल्प यात्रा के नाम पर – 7,50,00 रुपये,आनंद उत्सव व नल-जल योजना सामग्री – 65,000 रुपये,विकसित भारत यात्रा– 25,000 रुपये इस तरह विकास यात्रा और कार्यकमों के नाम पर चार  बिलों में 215000 रूपए का भुगतान किया गया है।

इसके अलावा 15वें वित्त आयोग की राशि का भी बिना किसी निर्धारित प्रयोजन के, नल-जल विस्तारीकरण और अन्य मदों में लाखों का भुगतान कर दिया गया। सवाल यह है कि गांवों के विकास की बजाय यह राशि आयोजनों, पोस्टर-बैनर, पंडाल, खानपान और वाहनों पर खर्च की गई। जबकि ग्रामीणों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ कागजों में काम दिखाया गया और वास्तविक धरातल पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। अब बड़ा सवाल यह है कि सरकार द्वारा दी गई विकास की राशि का उपयोग आखिर किस तरह हो रहा है? क्या संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस तरह के खर्चों पर नजर रख रहे हैं? वहीं यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि पंचायतों में निगरानी तंत्र की कमी भ्रष्टाचारियों के लिए वरदान साबित हो रही है।

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