
— जबलपुर संभाग के डिंडौरी, मंडला और छिंदवाड़ा जिले के माध्यमिक शिक्षकों को 12 और 24 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर मिलेगा क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय क्रमोन्नत वेतनमान, आदेश में शामिल किए गए शिक्षकों के नाम।
जबलपुर। मध्यप्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत माध्यमिक शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। जबलपुर संभागीय उपायुक्त, जनजातीय कार्य तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने माध्यमिक शिक्षकों को प्रथम एवं द्वितीय क्रमोन्नति वेतनमान स्वीकृत करने का आदेश जारी किया है।
जारी आदेश के अनुसार
दरअसल जारी इस आदेश के तहत डिंडौरी, मंडला और छिंदवाड़ा जिले के पात्र शिक्षकों को 12 वर्ष और 24 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर नियमानुसार क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। जारी आदेश के अनुसार, प्रथम नियुक्ति पद संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2/अध्यापक संवर्ग से माध्यमिक शिक्षक पद पर संविलियन होने वाले शिक्षकों को 12 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर प्रथम क्रमोन्नति वेतनमान स्वीकृत किया गया है। इसके तहत छठवें वेतनमान में 9300-34800 रुपये वेतनमान के साथ 3600 रुपये ग्रेड पे तथा सातवें वेतनमान में लेवल-9 के अंतर्गत 36,200 से 1,14,800 रुपये का वेतनमान निर्धारित है।
इसी तरह 24 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले पात्र माध्यमिक शिक्षकों को द्वितीय क्रमोन्नति वेतनमान की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत छठवें वेतनमान में 9300-34800 रुपये वेतनमान के साथ 4200 रुपये ग्रेड पे तथा सातवें वेतनमान में लेवल-10 के तहत 42,700 से 1,35,100 रुपये का वेतनमान निर्धारित किया गया है।
आदेश में डिंडौरी जिले के भी कई शिक्षकों के नाम शामिल हैं। इनमें प्रथम क्रमोन्नति वेतनमान की सूची में सोनिया परस्ते का नाम दर्ज है। वहीं द्वितीय क्रमोन्नति वेतनमान की सूची में ओमकार सिंह मरावी, अंजना उद्दे, भागवती मरावी, हरिता धुर्वे, शैलेषा परस्ते, मुलिया श्याम, अमरवती मरावी, वर्षा शुक्ला, जलेन्द्र कुमार बरकड़े, राकेश कुमार बरकड़े, संगीता जैन, राजेन्द्र कुमार, विजय कुमार धुर्वे और राजेन्द्र कुमार पट्टा सहित अन्य शिक्षकों के नाम शामिल हैं।
सेवा पुस्तिका और विभागीय जांच का होगा परीक्षण
संभागीय उपायुक्त ने क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने से पहले संबंधित शिक्षकों के प्रथम नियुक्ति आदेश और सेवा पुस्तिका का मिलान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय जांच, आर्थिक अपराध, लोकायुक्त, न्यायालयीन प्रकरण अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित है, उनके मामलों में नियमानुसार परीक्षण के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि क्रमोन्नत वेतनमान के बाद किए जाने वाले वेतन निर्धारण का परीक्षण संबंधित कोष एवं लेखा कार्यालय से कराना अनिवार्य होगा। यदि किसी शिक्षक के प्रकरण में कोई विसंगति सामने आती है तो उसका वेतन निर्धारण रोककर तथ्यात्मक जानकारी के साथ संभागीय कार्यालय को भेजना होगा।


