स्वामित्व योजना की धीमी रफ्तार पर प्रशासन सख्त, 132 प्लॉट में से महज 18 की रजिस्ट्री, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सेवा समाप्ति के प्रस्ताव की चेतावनी
डिंडौरी। स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही और पंजीयन कार्य की बेहद धीमी गति को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शहपुरा तहसील के अमेरा राजस्व निरीक्षक मंडल अंतर्गत हल्का नंबर 66 के पटवारी आशुतोष एक्का को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संबंधित हल्के में करीब 45 दिन बीतने के बाद भी 132 प्लॉट में से महज 18 का ही पंजीयन हो सका है। कार्य की इस स्थिति पर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने नाराजगी जताई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम खाल्हे महेशपुरी में 21 प्लॉट के विरुद्ध केवल 4 प्लॉट का पंजीयन हुआ है। इसी तरह ग्राम खम्हरिया रैयत में 47 प्लॉट में से महज 5 और ग्राम पटपरा मा. में 64 प्लॉट में से केवल 9 प्लॉट का पंजीयन किया गया है। तीनों गांवों को मिलाकर कुल 132 प्लॉट में से 114 का पंजीयन अब भी शेष है। आंकड़े बताते हैं कि करीब डेढ़ महीने की अवधि में निर्धारित कार्य का बेहद कम हिस्सा ही पूरा हो पाया है।
बताया गया कि स्वामित्व योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके माध्यम से ग्रामीणों को उनकी आवासीय संपत्तियों का अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराया जाना है। योजना के निर्धारित लक्ष्य को समय सीमा में पूरा करने के लिए संबंधित पटवारी को समिति की बैठकों सहित विभिन्न माध्यमों से पहले भी कई बार निर्देश और चेतावनी दी जा चुकी थी। इसके बावजूद कार्य की प्रगति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
कलेक्टर के निर्देश पर जारी कारण बताओ सूचना पत्र में पटवारी को दो दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, सेवा समाप्ति के प्रस्ताव की प्रक्रिया भी वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा सकती है। अब देखना होगा कि नोटिस के बाद पंजीयन कार्य में कितनी तेजी आती है और संबंधित पटवारी अपने जवाब में देरी की क्या वजह बताते हैं।

